मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के मंशानुरूप उज्जैन पुलिस और प्रशासन प्रभावी ढंग से महिला संबंधी अपराधों समेत अन्य गंभीर मामलों में सख्त कार्रवाई कर रहा है। साथ ही दबंग किस्म के आरोपियों की जमानत निरस्त कर उन्हें जेल भेजा जा रहा है। महिला संबंधी अपराध में जमानत निरस्त करने की प्रदेश में पहली कार्रवाई के पश्चात अब पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा के नेतृत्व में डरा धमकाकर वसूली करने के प्रकरण में जमानत निरस्त करने की कार्रवाई घट्टिया थाना पुलिस ने की है। धारा 386 के तहत थाना घट्टिया में दर्ज प्रकरण में आरोपी लाखन यादव उर्फ लखन की जमानत तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश पवन कुमार पटेल द्वारा निरस्त करते हुए आरोपी को विचारण न्यायालय में तत्काल समर्पण करने के आदेश दिए दिए हैं।
गौरतलब है कि आरक्षी केंद्र घट्टिया में दर्ज प्रकरण में आरोपी लाखन यादव उर्फ लखन पिता मांगीलाल मालवीय को अपर सत्र न्यायालय के जमानत आवेदन धारा 386 भादंसं में अपराध नहीं करने की शर्त पर जमानत पर छोड़ा गया था। जिसके बाद आरोपी लखन यादव ने फरियादी विष्णु बैरागी पर बयान बदल कर राजीनामा करने का दबाव बनाया। फरियादी ने मना किया तो आरोपी ने गाली गलौज कर जान से मारने की धमकी भी दी। पीड़ित की शिकायत पर थाना घट्टिया पुलिस ने केस कर विवेचना में लिया। जिस पर आरोपी लखन यादव द्वारा जमानत शर्त का उल्लंघन करने के कारण पुलिस अधीक्षक शर्मा के निर्देशन में थाना प्रभारी घट्टिया ने जमानत आवेदन निरस्त करने का निवेदन किया।
पुलिस ने कोर्ट को बताया कि आरोपी द्वारा जिस मामले में जमानत प्राप्त की गई थी, उसने उसी मामले से संबंधित फरियादी को राजीनामा करने के लिए धमकाया। इससे साफ है कि आरोपी ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है। साथ ही जमानत पर रहने के दौरान वह अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल भी रहा है। जिसके बाद न्यायालय तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश उज्जैन ने आरोपी लाखन यादव की जमानत रद्द कर दी। न्यायलय द्वारा आरोपी को निर्देशित किया गया है कि वह तत्काल विचारण न्यायालय के समक्ष समर्पण करे। अगर, वह ऐसा नहीं करता है तो तो विचारण न्यायालय आरोपी के जमानत मुचलके को जब्त करने और गिरफ्तारी के लिए स्वतंत्र होगा।