मध्य प्रदेश में 'लंदन प्राइड' ट्रेडमार्क के तहत व्हिस्की बनाने वाली कंपनी को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निर्देश दिया कि वे अपनी पैकेजिंग बदलने पर विचार करें। क्योंकि वे शराब प्रमुख पेरनोड रिकर्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की 'ब्लेंडर्स प्राइड' और 'इंपीरियल ब्लू' व्हिस्की के समान थे।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने 'लंदन प्राइड" ब्रांड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एस. मुरलीधर से निर्देश लेने और सुनवाई की अगली तारीख तक कंपनी की प्रतिक्रिया के बारे में सूचित करने को कहा है। उन्होंने कहा कि आपने (लंदन प्राइड) एक ही व्यापारिक पैकेजिंग और रंग को क्यों अपनाया है? पीठ ने कहा कि इस बारे में निर्देश प्राप्त करें कि क्या आप इसे बदलेंगे।
शीर्ष अदालत ने कहा कि वह अगली सुनवाई में नामों पर ट्रेडमार्क विवाद के मुद्दे पर दलीलें सुनेगी। व्हिस्की ब्रांडों के ट्रेडमार्क के कथित उल्लंघन पर कानूनी लड़ाई में 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में एक असामान्य दृश्य देखा गया, क्योंकि देश की सर्वोच्च अदालत के समक्ष शराब की बोतलें रखी गई थीं। शीर्ष अदालत मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के पिछले नवंबर के फैसले के खिलाफ शराब की प्रमुख कंपनी पेरनोड रिकर्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो 'ब्लेंडर्स प्राइड' और 'इंपीरियल ब्लू' व्हिस्की का निर्माण और बिक्री करती है।
पेरनोड रिकर्ड ने वाणिज्यिक अदालत, इंदौर द्वारा पारित एक आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसने अस्थायी निषेधाज्ञा जारी करने के लिए उसके आवेदन को खारिज कर दिया था। फर्म ने अपने ट्रेडमार्क के उल्लंघन का आरोप लगाया था। इसने हाईकोर्ट को बताया कि उसने 'ब्लेंडर्स प्राइड' और 'इंपीरियल ब्लू' के संबंध में व्यापार चिह्न पंजीकृत किया है और सीग्राम के संबंध में भी व्यापार चिह्न पंजीकृत किया है, जो उनका घरेलू चिह्न है और विभिन्न ब्रांडों के तहत बेचे जाने वाले उनके उत्पादों पर दिखाई देता है। इसने आरोप लगाया कि जेके एंटरप्राइजेज ने उनके ट्रेडमार्क की नकल की है और 'लंदन प्राइड' ट्रेडमार्क के तहत अपनी व्हिस्की का निर्माण और बिक्री कर रहा है। हाईकोर्ट ने पेरनोड रिकर्ड की याचिका को खारिज कर दिया था।