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Acharya Shri Vidyasagar: टीकमगढ़ के कण-कण में बसी है आचार्य विद्यासागर की स्मृतियां, छह साल पहले किया था विहार

Sun, 18 Feb 2024 07:45 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, टीकमगढ़

सार

आचार्य विद्यासागर महाराज को टीकमगढ़ जिले के अतिशय क्षेत्र पपौरा, सिद्ध क्षेत्र अहार और बंधा जी से गहरा नाता रहा है। उन्हें यह क्षेत्र बहुत प्रभावित करते थे। 
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आचार्यश्री छह साल पहले टीकमगढ़ जिले में पहुंचे थे. - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आचार्य विद्यासागर महाराज के समाधिस्थ होने की खबर से टीकमगढ़ में शोक की लहर दौड़ गई। आचार्य श्री का जिले से खासा लगाव रहा है और उन्होंने जिले के हर तीर्थ क्षेत्र पर लंबा समय बिताया है। छह साल पूर्व 2018 में आचार्य श्री ग्रीष्म कालीन प्रवास पर अतिशय क्षेत्र पपौरा आए थे और यहां पर प्रतिभा स्थली की सौगात दी थी।
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आचार्य विद्यासागर महाराज के समाधिस्थ होने की खबर से सकल जैन समाज स्तब्ध रह गया। यह खबर मिलते ही बाजार में जैसे सन्नाटा पसर गया। शहर का पूरा बाजार बंद रहा और लोग आचार्य श्री के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करते दिखाई दिए। सोशल मीडिया से लेकर पूरे बाजार में आचार्य श्री की चर्चाएं होती रहीं और लोग उनके संस्मरण को याद करते रहे। आचार्य श्री ने जिले में दो बार जहां चातुर्मास किया है तो 2018 में 20 अप्रैल को वह जिले में ग्रीष्मकालीन प्रवास पर पहुंचे थे। आचार्य श्री ने यहां पर पूरे 70 दिन का समय व्यतीत किया है। 

लगाव था अहार जी और पपौरा जी से
आचार्य विद्यासागर महाराज को जिले के अतिशय क्षेत्र पपौरा, सिद्ध क्षेत्र अहार और बंधा जी से गहरा नाता रहा है। उन्हें यह क्षेत्र बहुत प्रभावित करते थे। ऐसे में सन 1985 में आचार्य श्री ने सिद्धक्षेत्र अहार जी में ग्रीष्म कालीन प्रवास के साथ ही चातुर्मास किया था और पूरे 7 माह का समय यहां व्यतीत किया था। 1986 में वे चातुर्मास के लिए अहार जी पहुंचे थे। इस समय भी यहां पर लगभग 8 माह का समय व्यतीत किया गया था। जिले के जैन समाज द्वारा पपौरा जी में प्रतिभा स्थली निर्माण करने की बात जैसे ही आचार्य श्री को पता चली वे 2018 में 20 अप्रैल को फिर से पपौरा जी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने यहां पर 70 दिन का समय व्यतीत किया। इस दौरान वह बंधा जी दर्शन करने के लिए पहुंचे तो यहां पर रजत मंदिर की नींव रखी। 
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पूरे दिन होती रहीं चर्चाएं 
आचार्य श्री के समाधिस्थ होने की खबर के बाद जैन समाज में पूरे दिन उनकी चर्चा होती रही। लोग अपने पुराने संस्मरण सुनाते रहे। कोई भी यह मानने को तैयार नहीं था कि आचार्य श्री अब उनके बीच नहीं हैं। टीकमगढ़ शहर के रहने वाली पुष्पेंद्र जैन केसवगढ़ ने बताया कि आचार्य श्री का टीकमगढ़ से विशेष लगाव था। टीकमगढ़ जिले के सुप्रसिद्ध जैन धार्मिक स्थल पपौरा से खासा स्नेह था। 
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