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MP News: सिंधिया राजघराने का महा-समझौता फिर अटका, 27 जुलाई तक टली ग्वालियर जिला कोर्ट में सुनवाई

Mon, 20 Jul 2026 08:07 PM IST
ग्वालियर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर

सार

ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की अरबों-खरबों रुपये की संपत्ति विवाद पर प्रस्तावित समझौते की सुनवाई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने से टल गई। अब 27 जुलाई को सुनवाई होगी। समझौते के तहत कब्जे वाली संपत्ति उसी सदस्य को मिलेगी। मंजूरी मिलने पर देशभर की अदालतों में लंबित कई मुकदमे समाप्त हो सकते हैं।
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सिंधिया राजघराने की संपत्ति पर 27 जुलाई को अगली सुनवाई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश के सबसे चर्चित राजघरानों में शामिल ग्वालियर के सिंधिया परिवार की अरबों-खरबों रुपये की विरासत के बंटवारे पर होने वाला बहुप्रतीक्षित महा-समझौता फिर टल गया। सोमवार को ग्वालियर जिला न्यायालय में इस मामले पर अंतिम सहमति की उम्मीद थी, लेकिन जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण सुनवाई आगे बढ़ा दी गई। अब इस मामले में 27 जुलाई को आगे सुनवाई होगी।
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केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से जिला न्यायालय में समझौता आवेदन पेश किया गया है। इस प्रस्ताव के मुताबिक, सिंधिया परिवार के सदस्यों के बीच वर्षों से चल रहे संपत्ति विवाद को आपसी सहमति से खत्म करने पर सहमति बन चुकी है। इस समझौते में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उनकी बुआएं, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया, उषा राजे राणा समेत परिवार के अन्य सदस्य शामिल हैं। हालांकि, सोमवार को सुनवाई इसलिए पूरी नहीं हो सकी, क्योंकि बुआओं के दावों से जुड़ा रिकॉर्ड हाई कोर्ट से जिला अदालत तक नहीं पहुंच पाया। इसी वजह से कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई तय की है।

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जो जिस संपत्ति पर काबिज वह उसकी होगी
सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित समझौते का आधार यह है कि परिवार का जो सदस्य जिस संपत्ति पर वर्तमान में काबिज है, वही उस संपत्ति का अंतिम मालिक माना जाएगा। यदि कोर्ट इस समझौते को मंजूरी देता है तो ग्वालियर का जयविलास पैलेस, शिवपुरी की संपत्तियां और अन्य कई महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों का स्वामित्व भी इसी सिद्धांत के आधार पर तय होगा। सिंधिया राजघराने की अधिकांश संपत्तियां सीधे किसी व्यक्ति के नाम पर नहीं, बल्कि सर जयाजीराव ट्रस्ट, कृष्ण माधव ट्रस्ट और अन्य संस्थाओं के अधीन हैं। वहीं, दिल्ली की सिंधिया पॉटरीज की जमीन पर बनी कोठियों में परिवार के कई सदस्य वर्तमान में निवास कर रहे हैं।
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समझौता होने पर देश की कई अदालतों में चल रहे केस खत्म होंगे
यदि यह महा-समझौता अदालत से मंजूरी पा जाता है, तो दिल्ली, मुंबई, पुणे और ग्वालियर की अदालतों में वर्षों से लंबित एक दर्जन से अधिक मुकदमों का हमेशा के लिए पटाक्षेप हो सकता है। ग्वालियर में चल रहे पांच मामले भी वापस लिए जाने की संभावना है। अब सबकी नजर 27 जुलाई की सुनवाई पर है। अगर उस दिन अदालत इस समझौते पर अपनी मुहर लगा देती है तो सिंधिया राजघराने का वर्षों पुराना संपत्ति विवाद इतिहास बन जाएगा।
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