MP: अभी भाजपा नेता सौभाग्य सिंह ठाकुर के समर्थकों के बड़े काफिले का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि अब भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के काफिले का वीडियो वायरल हो गया है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब खुद प्रधानमंत्री मोदी पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचत की लगातार अपीलों के बीच शिवपुरी जिले से सामने आया एक वीडियो सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी मंगलवार को करीब सौ वाहनों के विशाल काफिले के साथ करेरा स्थित सिद्ध बगीचा सरकार मंदिर पहुंचे। विधायक समर्थकों ने खुद ही काफिले के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए, जिसके बाद ईंधन बचत के संदेश और नेताओं की जमीनी हकीकत पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, करेरा में विधायक पुत्र से जुड़े चर्चित एक्सीडेंट मामले के बाद यह पहला मौका था, जब प्रीतम लोधी इतने बड़े लवाजमे के साथ क्षेत्र में पहुंचे। राजनीतिक हलकों में इसे शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि विधायक का कहना है कि वे बगीचा सरकार मंदिर में महंत पक्ष और पुजारी पक्ष के बीच चल रहे एकाधिकार विवाद को सुलझाने पहुंचे थे।
मंदिर परिसर में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए विधायक के तेवर भी तल्ख नजर आए। उन्होंने कहा, “यह मंदिर किसी के डैडी का नहीं है। अभी हिंदी में समझा रहा हूं, जरूरत पड़ी तो अंग्रेजी में समझाना भी आता है।” उनके इस बयान को मंदिर में कब्जे को लेकर चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। विधायक ने दोनों पक्षों को चेतावनी देते हुए कहा कि आस्था के केंद्र को अखाड़ा न बनाया जाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मंचों से देशवासियों से ईंधन बचाने, साइकिल चलाने और अनावश्यक वाहनों के उपयोग से बचने की अपील कर चुके हैं। ऐसे में सत्ताधारी दल के विधायक का सैकड़ों गाड़ियों के काफिले के साथ निकलना विपक्ष को बड़ा मुद्दा दे गया है। कांग्रेस नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि “जब भाजपा विधायक ही प्रधानमंत्री की अपील को गंभीरता से नहीं ले रहे, तो जनता से क्या उम्मीद की जाए?”
सफाई में क्या बोले विधायक?
वहीं विधायक समर्थकों का कहना है कि यह जनसमर्थन का प्रतीक था और लोग स्वेच्छा से काफिले में शामिल हुए। फिलहाल जिला प्रशासन ने पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है, जबकि भाजपा संगठन ने इसे विधायक का निजी दौरा बताया है। आगामी चुनावों से पहले क्षेत्र में राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कवायद के तौर पर भी इस पूरे घटनाक्रम को देखा जा रहा है।