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Sheopur: किसान के घर में घुसा मगरमच्छ, गांववालों ने रातभर खूंटे से बांधकर रखा, 24 घंटे बाद वन विभाग ने छुड़ाया

Mon, 22 Jul 2024 04:40 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर

सार

किसान मूलचंद मीणा के घर में एक मगरमच्छ घुस गया। जिसे किसान ने पड़ोसी ग्रामीणों की मदद से रस्सी से बांधकर मवेशियों को बांधने वाले लकड़ी के खूंटे से बांध दिया। 
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श्योपुर में गांववालों ने मगरमच्छ को खूंटे से बांधकर रख दिया। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बारिश में एक मगरमच्छ कहीं से आकर गांव में दाखिल होकर एक किसान के घर में घुस गया। गनीमत यह रही कि वह किसी पर हमला करता इससे पहले ग्रामीणों की उस पर नजर पड़ गई और उन्होंने उसे रस्सी से बांधकर बंधक बना लिया। सोमवार को वन विभाग अमले को मामले की जानकारी होने के बाद वन विभाग टीम ने मगरमच्छ को मुक्त कराकर चंबल नदी में छोड़ दिया।
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मामला देहात थाना इलाके के बिलबाड़ी गांव का है, जहां किसान मूलचंद मीणा के घर में एक मगरमच्छ घुस गया। जिसे किसान ने पड़ोसी ग्रामीणों की मदद से रस्सी से बांधकर मवेशियों को बांधने वाले लकड़ी के खूंटे से बांध दिया। रातभर यह मगरमच्छ वहीं बंधा रहा, सोमवार सुबह होने के बाद करीब 1 बजे वन विभाग टीम ने मगरमच्छ को मुक्त करा दिया। गांवों में मगरमच्छ घुसने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इस वजह से नदी नालों के आसपास के ग्रामीणों में दहशत बढ़ गई है।

पहले भी आ चुके ऐसे मामले
देहात थाना इलाके के बिलबाड़ी गांव से पहले वीरपुर थाना इलाके के श्यामपुर गांव में मगरमच्छ घुस गया था। तब ग्रामीणों और वन अमले ने उसे रेस्क्यू करके चंबल में छोड़ दिया था। उससे पहले सोईकलां कस्बे में सीप नदी से के पास खड़े एक श्वान का शिकार भी मगरमच्छ ने कर लिया था। यानी महीने भर में कुल तीन मामले अब तक सामने आ चुके हैं।
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15 किमी दूर गांव में भी पहुंच रहे
बारिश का सीजन शुरू होने के बाद महीने भर के भीतर श्योपुर जिले के तीन अलग अलग गांवों में मगरमच्छ घुसे हैं। ऐसा तब है जब चंबल और पार्वती नदियों की दूरी इन गांवों से 10 से 15 किलोमीटर है। इसे लेकर लोगों में भय का माहौल है और लोग यह सोचने को विवश हैं कि नदियों से इतनी दूरी पर यह मगरमच्छ आखिरकार आ कैसे रहे हैं। इसके बाद वे 10 से 15 किलोमीटर तक चलकर रिहाइशी इलाकों में पहुंच जाते हैं, जब भी कहीं मगरमच्छ या दूसरे जलीयजीवों के होने की सूचना मिलती है तो हमारे विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर उन्हें रेस्क्यू कर लेती है और चंबल नदी के जल में स्वतंत्र प्रवाह के लिए उन्हें छोड़ दिया जाता है।
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