क्लास रूम में छाता लेकर पढ़ने को मजबूर विद्यार्थी
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शहडोल की गोहपारू ब्लॅाक की भुरजी हाईस्कूल खस्ता हालत में है। बरसात में स्कूल के बच्चे हर बार परेशानी का सामना करते हैं। छतरी लेकर क्लास रूम में विद्यार्थी पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल की छत टपकने से विद्यार्थियों को पढ़ने में दिक्कतें होती हैं। 10 साल पहले ही नई बिल्डिंग को स्वीकृति मिल गई थी, लेकिन अब तक नई स्कूल निर्माणाधीन हालत में ही है।
दरअसल, जिले की एक स्कूल ऐसी भी है, जहां लगातार हो रही बारिश के चलते विद्यार्थियों को हर साल परेशानी का सामना करना पड़ता है। विद्यार्थी छाता लेकर स्कूल में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बारिश के वक्त स्कूल की छत टपकती है। तीन दिन से हो रही बारिश लगातार सिस्टम के पोल खोलती जा रही है। गोहपारू ब्लॉक में भुरसी हाईस्कूल के छात्र और शिक्षक छाता लेकर अध्ययन-अध्यापन का काम कर रहे हैं। स्कूल की लगभग पूरी छत टपक रही है। छत के ऊपर सोलर पैनल लगा है, इस कारण स्कूल प्रबंधन छत मरम्मत न करा पाने की अपनी मजबूरी बता रहा है।
लगभग 10 साल पहले नई बिल्डिंग स्वीकृत हो चुकी थी। साथ ही अब तक आधा निर्माण कार्य भी किया जा चुका है, लेकिन उस पर गांव के ही एक व्यक्ति ने अपनी भूमि बताकर स्टे लगा दिया है। बच्चों को नए भवन देने की सौगात 10 साल से लंबित है, लेकिन सरकारी सिस्टम एक दशक बीत जाने के बाद भी समस्या का हल नहीं निकाल पा रही है। हाईस्कूल भुरसी के पास खुद की तीन कक्षाएं हैं। उन्हें कम से कम पांच कमरों की आवश्यकता है। इस कारण स्कूल प्रबंधन को मजबूरन परिसर में ही स्थित प्राइमरी स्कूल से दो कमरे उधार में लेने पड़े, जिसके बाद हाईस्कूल की कक्षाएं प्राइमरी स्कूल में लग रही हैं।
नई बिल्डिंग में कमरे पर्याप्त हैं। भवन का आधा निर्माण भी हो चुका है। इसी बीच गांव के ही गुप्ता परिवार ने जमीन पर मालिकाना हक जताकर निर्माण में स्टे लगा दिया है। गुप्ता परिवार केस भी जीत गए और लगभग 70 हजार का मुआवजा भी उन्हें देने का आदेश हुआ। इसके बाद भी इस प्रकरण का आज तक निराकरण नहीं सका है। इस स्कूल में 200 विद्यार्थियों की पढ़ाई होती है। बरसात की वजह से अब पढ़ाई में भी दिक्कत आने लगी हैं। स्कूल आते समय बच्चे अपने घरों से छाता लेकर आते हैं।