वर्षों से शहर से निकलने वाले कचरे का उचित निष्पादन न होने के कारण ट्रेंचिंग ग्राउंड बदबू और बीमारियों का केंद्र बन गया था। खासकर मुस्लिम मोहल्ले के रहवासियों के साथ-साथ पूरे शहर के लोग इस समस्या से त्रस्त थे। लेकिन, अब कचरे के पहाड़ से छुटकारा मिलेगा।
भैरुंदा शहर के ट्रेंचिंग ग्राउंड पर तीन दशकों से जमा अनुपयोगी कचरे के पहाड़ को हटाने की बहुप्रतीक्षित प्रक्रिया आखिरकार नगर परिषद ने शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 के तहत विरासत में मिले 16 हजार टन कचरे के वैज्ञानिक निष्पादन के लिए रीवा की हाई विजन इन्फ्रा एंड कंसलटेंट कंपनी के साथ 70 लाख रुपए का अनुबंध किया गया है। कंपनी ने ट्रेंचिंग ग्राउंड पर आरडीएफ संयंत्र स्थापित कर कार्य आरंभ कर दिया है।
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वर्षों से शहर से निकलने वाले कचरे का उचित निष्पादन न होने के कारण ट्रेंचिंग ग्राउंड बदबू और बीमारियों का केंद्र बन गया था। खासकर मुस्लिम मोहल्ले के रहवासियों के साथ-साथ पूरे शहर के लोग इस समस्या से त्रस्त थे। मच्छरों और मक्खियों की भारी तादाद बीमारियों को खुला निमंत्रण दे रही थी। नगर परिषद की इस पहल से न केवल शहरवासियों को 30 साल पुराने कचरे से निजात मिलेगी, बल्कि कचरे के कारण अनुपयोगी पड़ी बहुमूल्य भूमि का भी सदुपयोग हो सकेगा। नगर परिषद द्वारा 22 अप्रैल को कार्यादेश जारी होने के बाद, कंपनी को यह कार्य चार महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। इस परियोजना के तहत वर्षों से जमा विशाल कचरे का बायोमाइनिंग प्रक्रिया के माध्यम से वैज्ञानिक उपचार किया जाएगा।
वार्डवासियों को बीमारियों से मिलेगा छुटकारा
ट्रेंचिंग ग्राउंड पर पूरे शहर का कचरा वर्षों से डंप किया जा रहा था, जिसमें गीला और सूखा कचरा मिश्रित होने के कारण हर दिन उठने वाली दुर्गंध से वार्ड के लोग परेशान थे। गंदगी के इस ढेर के कारण कई तरह की बीमारियों का खतरा मंडरा रहा था। वहीं, नगर परिषद भी कचरे के कारण इस महत्वपूर्ण भूमि का उपयोग नहीं कर पा रही थी। यह कदम निश्चित रूप से स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इस विरासत कचरे से न केवल पर्यावरण प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी, बल्कि अपशिष्ट से निकलने वाले हानिकारक तत्वों से आम लोगों को बीमारियों के खतरे से भी निजात मिलेगी। इसके अतिरिक्त, बड़ी मात्रा में जमा कचरे के कारण अनुपयोगी बनी जमीन अब अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जा सकेगी और आग लगने का खतरा भी टलेगा।
क्या है बायोमाइनिंग प्रक्रिया?
नगर परिषद के इंजीनियर दीपक यादव ने बायोमाइनिंग प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा कि इसके तहत वर्षों से डंप किए गए असंयोजित और मिश्रित ठोस अपशिष्ट का उपचार किया जाता है। इस कचरे के कारण हवा, पानी और मिट्टी दूषित हो रही थी, जिससे अब मुक्ति मिल सकेगी। कचरे के निष्पादन के लिए ग्राउंड पर कंपनी द्वारा ट्रोमेल संयंत्र स्थापित किया गया है, जिसके माध्यम से कचरे को अलग-अलग करके उसका विभिन्न तरीकों से उपयोग किया जाएगा। कचरे से निकली मिट्टी का उपयोग ग्राउंड फिलिंग, गार्डन और अन्य स्थानों पर किया जा सकेगा, जबकि आरडीएफ का उपयोग सीमेंट फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में किया जाएगा।