चिन्हित एवं जघन्य सनसनीखेज प्रकृति के एक मामले में पीड़िता को बहला-फुसलाकर दो आरोपी जंगल में ले गए और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद दोनों आरोपी पीड़िता को बेहोशी की हालत में छोड़कर भाग गए। दो साल पुराने इस प्रकरण में पॉक्सो न्यायालय के विशेष न्यायाधीश अभिलाष जैन ने एक आरोपी को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, दूसरे आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
विशेष लोक अभियोजक केदार सिंह कौरव ने बताया कि मामला दो साल पुराना है। पीड़िता ने अपने माता-पिता के साथ रेहटी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें कहा था कि 15 मार्च 2023 को शाम को वह अपने खेत से चने काटकर अपने घर जा रही थी। इसी दौरान खेत के पास जहां जंगल सा पड़ता है, वहां पर आरोपी विपिन और सीताराम मिले। दोनों उसे पकड़कर जंगल के नाले में ले गए और मुंह दबाकर दोनों ने दुष्कर्म किया। इसके बाद दोनों भाग गए। बेहोश होने के कारण पीड़िता रातभर नाले के पास पड़ी रही। अगली सुबह उठकर वह अपने घर आई और माता-पिता को घटना की जानकारी दी। इसके बाद माता-पिता के साथ पुलिस थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने अनुसंधान पश्चात अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य और तर्कों से सहमत होते हुए न्यायालय ने आरोपी विपिन ठाकुर (19) पिता जगदीश ठाकुर निवासी रेहटी जिला सीहोर को दोषी पाते हुए धारा 3(2)(व्ही) एससी/एसटी एक्ट में आजीवन कारावास एवं 2,000 रुपये का जुर्माना। धारा 376(3) भादवि में 20 वर्ष का कारावास एवं 1,000 रुपये का अर्थदंड से दंडित किया गया।
प्रकरण में एक अन्य आरोपी सीताराम का डीएनए मिलान नहीं होने के कारण न्यायालय ने बरी कर दिया। प्रकरण में न्यायाधीश ने पीड़िता को चार लाख रुपये प्रतिकर दिए जाने का आदेश भी प्रदान किया। प्रकरण को शासन स्तर पर जघन्य एवं सनसनीखेज श्रेणी में रखा गया। डीपीओ अनिल बादल के मार्गदर्शन में यह सीहोर जिले की चिन्हित प्रकरणों में वर्ष 2025 की दूसरी दोष सिद्धि है।