वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के बफर जोन में लकड़ी तस्करों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। गेम परिक्षेत्र झापन की बीट सोमखेड़ा से लगे ग्राम सुहेला में वन विभाग की संयुक्त टीम ने सर्च वारंट के आधार पर कार्रवाई करते हुए 52 नग अवैध सागौन की लकड़ी जब्त की है। वन विभाग इस कार्रवाई को बड़ी सफलता बता रहा है लेकिन टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इतनी बड़ी मात्रा में इमारती लकड़ी का मिलना सुरक्षा व्यवस्था और गश्त पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
गुप्त सूचना पर दी दबिश
वनमंडल अधिकारी के दिशा-निर्देशों के तहत परिक्षेत्र सुश्री मनीषा मुकाती (वनक्षेत्रपाल) के नेतृत्व में परिक्षेत्र मोहली और झापन की संयुक्त टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर टीम ने सुहेला निवासी भीकम सिंह पिता करण सिंह लोधी के घर पर सर्च वारंट के साथ दबिश दी।
कार्रवाई के दौरान घर पर ताला बंद मिलने पर ग्राम सरपंच एवं अन्य स्थानीय ग्रामीणों की मौजूदगी में आसपास तलाशी ली गई, जहां से 52 नग अवैध सागौन की लकड़ियां बरामद की गईं। इस पूरी कार्रवाई में वन अमले के साथ पुलिस चौकी इमलिया का स्टाफ भी साजो-सामान के साथ शामिल रहा।
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सुरक्षा पर उठ रहे गंभीर सवाल
वन विभाग सागौन जब्ती की इस कार्रवाई के जरिए अपनी पीठ थपथपा रहा है लेकिन स्थानीय स्तर पर यह घटना वन विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। सवाल यह है कि वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के संरक्षित बफर जोन में इतनी भारी मात्रा में बेशकीमती सागौन के पेड़ काटे जाते रहे और टाइगर रिजर्व का मैदानी अमला, बीट गार्ड व अधिकारी पूरी तरह बेखबर रहे? वन्यजीवों की सुरक्षा और जंगलों के संरक्षण के लिए तैनात अमले की यह ढिलाई और निगरानी में कमी क्षेत्र के प्राकृतिक संतुलन के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।