मध्यप्रदेश में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। कांग्रेस ने प्रदेश की 230 तो भाजपा ने 228 सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। आगामी 17 नवबंर को प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। चुनाव से पहले अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' प्रदेशभर के मतदाताओं का मन टटोलने निकला है। आज हमारा कारवां सागर पहुंचा है, जहां सुबह के वक्त आम मतदाताओं से अमर उजाला ने चर्चा की और अब अमर उजाला युवाओं के बीच उनके मुद्दे जानने के लिए पहुंचा है।
'रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य इन तीनों में से कुछ अच्छा नहीं'
एक युवा ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि युवाओं के लिए यहां सागर में कोई रोजगार नहीं हैं। रोजगार के अभाव में यहां से कई युवा पलायन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद शिक्षा का मुद्दा आता है। शिक्षा के क्षेत्र में अभी यहां कुछ नहीं है। दूर-दूर तक हम लोगों को पढ़ने-लिखने के लिए जाना पड़ता है। ग्रामीण इलाकों में अच्छी शिक्षा का कोई विकल्प नहीं है। स्वास्थ्य व्यवस्था भी अच्छी नहीं है। अस्पतालों की बिल्डिगें तो बनी बड़ी-बड़ी, लेकिन उनमें अच्छे डॉक्टर नहीं हैं। ये सब हमारे क्षेत्र में बहुत बड़े मुददे हैं।
'यहां एक नहीं, सैकड़ों महत्त्वपूर्ण मुद्दे हैं'
वहीं, मौके पर मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि ऐसा नहीं है जो कोई एक मुद्दा बड़ा है। ऐसे सैकड़ों मुद्दे हैं, जो महत्त्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि ये वो विधानसभा है जहां से एक प्रतिनिधि 40 साल से प्रतिनिधित्व कर रहा है। लोगों को बड़ी अपेक्षाएं थी उस व्यक्ति से, तभी इतने समय तक उसे अपना मत देते रहे। हर बार चुनाव के समय वह एक नया झूठ लेकर आए और लोगों को भ्रमित करके वोट लेकर फिर विधानसभा में पहुंचते रहे। उन्होंने कहा कि लेकिन इस बार लोगों ने मूड बनाया है कि ऐसा कुछ नहीं होने देंगे अब। हमारा विपक्ष का जो प्रत्याशी है, वह युवा है। प्रदेश में कमलनाथ जी की अच्छी छवि है। युवाओं को लेकर, हर वर्ग को लेकर चलने की जो उनकी छवि है। उस छवि के साथ लोग जाना चाह रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि तत्कालीन विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री रहे भार्गव जी ने पहले रोजगार के काफी अवसर देने की जो बात कही थी, उसमें लोगों के लिए रोजगार के अवसर लाएंगे, उद्योग लगाएंगे, सुगर मिल और टोमैटो कैचअप जैसी तमाम चीजें चलती रहीं। लेकिन वह नहीं हो पाए। आज उनके खाली बोर्ड लगे हुए हैं। रोजगार लोगों को नहीं मिल पाया है।
'स्कूलों में टीचर नहीं हैं और कॉलेज में सभी विषयों की पढ़ाई नहीं होती'
एक अन्य युवा ने बताया कि रहली विधानसभा क्षेत्र में शासकीय महाविद्यालय रहली और छोटे स्कूल 12वीं कक्षा तक हैं, हाईस्कूल और मिडिल क्लास के भी स्कूल हैं। कहीं-कहीं तो टीचर भी नहीं हैं। उन्होंने बताया कि रहली में सिर्फ एक ही कॉलेज है और वहां सभी विषयों की पढ़ाई भी नहीं होती है। उन्होंने कहा कि मुझे अच्छी और रोजगार चाहिए। यहां रोजगार तो किसी को मिल ही नहीं रहा है। ज्यादातर युवा किसानी और घर का काम कर रहे हैं।
'मौजूदा विधायक समस्याओं पर काम नहीं करना चाहते'
वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि यहां पर सबसे बड़ा मुद्दा है रोजगार। विधायक गोपाल भार्गव भी यह बात अच्छी तरह से जानते हैं। 2013 के चुनाव में इन्होंने रोजगार का मुद्दा समझते हुए एक वादा किया कि सुगर मिल लगाएंगे। इसके लिए भूमि पूजन करके एक बड़ा सा बोर्ड लगा दिया। लेकिन मिल नहीं लगी। उन्होंने कहा कि अगर सुगर मिल लग जाती तो किसानों की आय बढ़ती, लोगों को रोजगार मिल जाता। लेकिन उन्होंने ऐसा किया नहीं। दूसरा जब 2018 का चुनाव आया तो वो तो कर नहीं पाए थे तो 2018 में गोपाल भार्गव मंच से बोले कि हर घर में एक व्यक्ति को मैं रोजगार न दे पाऊं तो मैं मुंह नहीं दिखाऊंगा। उन्होंने आगे कहा कि विधायक हर घर में क्या उन्होंने तो पूरे क्षेत्र में एक घर के किसी व्यक्ति को रोजगार नहीं दिया और अब वह फिर चुनाव लड़ने के लिए आ गए।
उन्होंने कहा कि सबसे अहम समस्या है कि यहां मोहल्ले के मोहल्ले खाली हैं। कम से कम पचास से पचपन हजार लोग इस क्षेत्र से पलायन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि हमें खुशी होती है कि हमारा प्रतिनिधि जो है वह मंत्री बन रहा है। इनके लोग तो कई वर्षों से कह रहे हैं कि वह मुख्यमंत्री बनेंगे, लेकिन ऐसा होगा नहीं। लेकिन दुख की बात ये है कि प्रतिनिधि को हम इसलिए कहते हैं कि वह ऊपर पहुंचे, क्योंकि हमारे लिए कुछ करेंगे। लेकिन जब आपको कुछ करना-धरना नहीं है। ऐसा नहीं है कि वह क्षेत्र की समस्याएं जानते नहीं। लेकिन वह उनपर काम नहीं करना चाहते।
'नेता अपने फायदे के लिए बात करते हैं'
वहीं, एक स्कूली छात्र ने कहा कि अगर मैं मतदान करता तो अपने क्षेत्र में अच्छे कॉलेज के मुद्दे पर वोट देता। छात्र ने यह भी कहा कि नेता आम लोगों के मुद्दों की बात कभी नहीं करते। जब उनका फायदा होता है तब मुद्दे की बात पर आते हैं।