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MP News: आत्महत्या रोकथाम के लिए मसौदा बनाने टॉस्क फोर्स गठित, 6 उप समितियां भी बनाई

Sat, 10 Sep 2022 07:55 AM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्य प्रदेश में आत्महत्या के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए सरकार ने टॉस्क फोर्स का गठन किया है। इसकी मदद के लिए 6 उप समितियां भी बनाई है। इनको आत्महत्या के मामले को रोकने के लिए मौसदा तैयार करने का काम दिया गया।
 
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चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने शुक्रवार को बताया कि टॉस्क फोर्स और समितियां दो माह में सरकार को मसौदा तैयार करके देगी। इसको परीक्षण कर अमल में लाया जाएगा। सारंग ने कहा कि टॉस्क फोर्स में देश के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक, कानूनी जानकार, समाज के विभिन्न पहलुओं में काम करने वाले विशिष्ट नागरिक शामिल है। सारंग ने कहा कि वर्तमान में  लोग केरियर, परिवार और शिक्षा आदि में मानसिक दबाव के कारण आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं। इसको रोकने के लिये ठोस पहल की जाना आज की आवश्यकता है।
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सारंग ने बताया कि इस संबंध में कानूनी पहलुओं पर विधि विशेषज्ञों के साथ मिल कर सम्पूर्ण समस्या के निराकरण पर विचार-विमर्श होगा। समाज और विभाग द्वारा मिल कर जन-जागरूकता को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने भी आत्महत्या की रोकथाम की दिशा में काम करने के लिये कार्य-योजना बनाने को कहा है।
वर्तमान में केन्द्र सरकार द्वारा टोल फ्री नम्बर किरण के नाम से जारी किया गया है। आने वाले समय में राज्य सरकार द्वारा भी हेल्प लाइन शुरू की जायेगी। साथ ही संबंधित को कॉउंसलिंग की व्यवस्था और परिजन को प्रशिक्षण भी देने का प्रयास किया जायेगा। व्यक्ति के व्यवहार परिवर्तन का डाटा एनालिसिस कर उस पर काम किया जायेगा। 
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टास्क फोर्स का गठन
टास्क फोर्स में मुम्बई के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. हरिश शेट्टी, पुणे के डॉ. ऋषिकेश वी. बेहरे, भोपाल के डॉ. सत्कान्त त्रिवेदी, नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. डी विजय कुमार, मालवांचल विश्वविद्यालय के प्रो-वाईस चांसलर डॉ. रामगुलाम राजदान, एम्स के डॉ. विजयेन्द्र सिंह, वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आर.एन. साहू, एल. एन. यूनिवर्सिटी के डीन डॉ. डी के. सत्पथी, डॉ. राहुल रोकड़े और डॉ. जे.पी. अग्रवाल शामिल है।

अध्यात्मिक गुरुओं का भी लिया जाएगा सहयोग
मंत्री श्री सारंग ने कहा कि आत्महत्या के खिलाफ धार्मिक उपदेशों से जन-जागृति लायी जा सकती है। जिससे धर्म एवं अध्यात्म को भी रणनीति में जोड़ा जा सकता है। सुझाव दिया गया कि आत्महत्या की रोकथाम के लिए जन-प्रतिनिधियों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा आत्महत्या की रोकथाम के प्रति जनता में का प्रचार किया जाये। विद्यालय एवं महाविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं की रोकथाम हेतु काउन्सलर नियुक्त करने का सुझाव भी आया।
 
रणनीति बनाने वर्गीकरण करना जरूरी
मुंबई से आये प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. हरिश शेट्टी ने सुझाव दिया कि रणनीति निर्धारण के लिए वर्गीकरण करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने निम्न आय वर्ग एवं असंगठित श्रमिकों के भीतर आत्महत्या के कारणों को चिन्हित कर उनकी आवश्यकताओं पर बल दिया।
 
स्वयं सेवी संस्थाओं का भी लाये साथ
पुणे के मनोचिकित्सक डॉ. ऋषिकेश बेहरे ने सुझाव दिया कि आम जन-मानस में जागरूकता के लिये पीपीपी मोड पर स्वयं सेवी संस्थाओं के साथ कार्य किया जाए, जिससे एक मिशन के रूप में इसका विस्तार किया जा सकेगा।
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