कांग्रेस के पक्ष में जुलाई 2019 में क्रास वोटिंग करने से चर्चा में आए मैहर से भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी ने एक बार फिर भाजपा का दामन थाम लिया है। त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने भाजपा कभी छोड़ी ही नहीं थी। वहीं क्रास वोटिंग को लेकर पूछे गए सवाल को त्रिपाठी ने टाल दिया।
बता दें कि त्रिपाठी की भाजपा में वापसी, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की गैर-मौजूदगी में हुई। गौरतलब है पार्टी छोड़ते समय त्रिपाठी ने चौहान को खूब कोसा था। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के पक्ष में बयान देने के कुछ दिन बाद से ही त्रिपाठी पूर्व मंत्री विश्वास सारंग और संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी के संपर्क में थे।
करीब डेढ़ महीने पहले त्रिपाठी ने प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह से दिल्ली स्थित उनके आवास पर मुलाकात भी की थी। पिछले दो दिन से त्रिपाठी भोपाल के एक होटल में रुके हुए थे जहां से विश्वस सारंग उन्हें पूर्व मंत्री नरोत्तम के आवास पर ले गए। वहां से सभी पार्टी दफ्तर पहुंचे और त्रिपाठी को फिर से भाजपा की सदस्यता दिलाई। माना जा रहा है त्रिपाठी की भाजपा में वापसी पार्टी के लिए भुनाने लायक अवसर हो सकती है।
भ्रम में की थी क्रॉस वोटिंग, त्रिपाठी के पक्ष में बोले राकेश सिंह
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह का कहना है कि त्रिपाठी भ्रम में थे इसी वजह से उन्होंने क्रॉस वोटिंग कर दी थी, त्रिपाठी शुरू से ही भाजपा में हैं और रहेंगे। राकेश सिंह ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने त्रिपाठी के भाजपा छोड़ने को लेकर भ्रम फैलाया हुआ था। मैं इसी भ्रम को दूर करने के लिए यहां आकर बैठा हूं।
त्रिपाठी ने राकेश सिंह के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। इस दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस मुगालते में है और प्रलोभन की राजनीति के जरिए मध्यप्रदेश में एक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। त्रिपाठी ने कहा कि कांग्रेस दिशाहीन पार्टी है, इसका कोई नेतृत्व, कोई विचार और सोच नहीं है। मैं कभी कांग्रेस में नहीं गया, मैं भाजपा में था और रहूंगा।
त्रिपाठी ने 15 सालों में बदली हैं पांच पार्टियां
त्रिपाठी के दल बदलने का इतिहास नया नहीं है। उन्होंने पिछले 15 सालों में पांच बार अपनी पार्टी बदली है। साल 2003 में वह समाजवादी पार्टी की ओर से मैहर सीट पर चुनाव लड़े और विधायक चुने गए। फिर 2013 में वे कांग्रेस में शामिल हो गए दोबारा विधायक बने। इसके बाद लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर त्रिपाठी ने भाजपा का दामन थाम लिया।
त्रिपाठी की बागी नेता वाली छवि तब भाजपा के सामने आई जब उन्होंने जुलाई 2019 के सत्र में शरद कोल के साथ मिलकर कांग्रेस के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की। इसके बाद दोनों विधायकों ने मिलकर कमलनाथ की मौजूदगी में भाजपा और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर गंभीर आरोप भी लगाए।
वहीं ब्योहारी विधायक शरद कोल पहले ही कह चुके हैं कि वे भाजपा के साथ हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले कोल, शहडोल में कांग्रेस के उपाध्यक्ष थे।