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Mahakal lok: शिवराज की कल्पना को कमलनाथ ने दिया आकार, अब जाकर हुआ श्री महाकाल लोक साकार

Tue, 11 Oct 2022 02:51 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उज्जैन में श्री महाकाल कॉरीडोर के लोकार्पण करने से पहले बीजेपी और कांग्रेस में श्रेय की होड़ लगी है। दोनों के दावों की तफ्तीश करने पर पता चला कि यह श्रेय दोनों को ही जाता है। जानिए कैसे- 
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शिवराज चौहान और कमलनाथ
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन में श्री महाकाल लोक का लोकार्पण करेंगे। इससे पहले बीजेपी और कांग्रेस में महाकाल कॉरीडोर निर्माण का श्रेय लेने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए है। कांग्रेस का कहना है कि यह प्रोजेक्ट उसकी सरकार की देन है। 2019 में कांग्रेस की सरकार ने 300 करोड़ रुपये प्रोजेक्ट के लिए रखे थे। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि हमने जो किया वह रिकॉर्ड पर है। यह सब चीजों का श्रेय लेना चाहते है। दूसरी तरफ खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान महाकाल कॉरीडोर की कल्पना 2016 में सिहस्थ के समय करने की बात कह चुके हैं। कांग्रेस के आरोपों पर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कमलनाथ जी को झूठ बोलने का शगल है।

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हमने थोड़ी तफ्तीश की तो पता चला कि दोनों के दावे कुछ हद तक सच भी है। इस प्रोजेक्ट की कल्पना भले ही शिवराज सिंह चौहान ने की हो, उसे मुख्यमंत्री रहते हुए कमलनाथ ने भी आगे बढ़ाया। जब उनकी सरकार चली गई और शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने तो इस प्रोजेक्ट को पंख लग गए। प्रोजेक्ट को विस्तार मिला और अब यह साकार भी हो गया है। यानी झूठ कोई नहीं बोल रहा है, लेकिन अपनी-अपनी सहूलियत के लिए एक-दूसरे को झूठा जरूर बताया जा रहा है। 
 
ऐसे हुई प्रोजेक्ट की शुरुआत
2016 के सिंहस्थ में शिवराज सिंह चौहान ने महाकाल कॉरीडोर की कल्पना की थी। इसके बाद महाकाल परिसर के कायाकल्प के लिए रायशुमारी शुरू हुई। 2017 में डीपीआर बनाने का काम शुरू किया गया, लेकिन 2018 में सरकार बदल गई। इसके बाद कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने महाकाल कॉरीडोर का ब्लू प्रिंट जारी किया। कुछ ही दिन बाद कांग्रेस की सरकार भी चली गई। तब शिवराज सरकार में कॉरीडोर का निर्माण कार्य शुरू हुआ और अब जाकर पहले चरण का काम पूरा हो गया है।

 
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2018 में सरकार बदल गई
वरिष्ठ पत्रकार प्रभु पटैरिया ने महाकाल कॉरीडोर पर बीजेपी और कांग्रेस के दावे पर कहा कि शिवराज सरकार के समय 2016 में सिहस्थ में कल्पना आई थी। उस समय नंदी हॉल का रेनोवेशन हुआ था। इससे ज्यादा से ज्यादा लोग पहुंचकर दर्शन कर सकें। उसी समय आधा घंटे में दर्शन करने के लिए एक नया प्रवेश द्वारा भी बनाया गया था। 2017 में शिवराज सरकार ने कॉरीडोर का ब्लू प्रिंट बनाने का काम शुरू किया। इसके बाद 2018 में सरकार बदल गई।
 
 
कमलनाथ सरकार ने बनाया ब्लू प्रिंट
2018 में कमलनाथ सरकार ने अपनी तरफ से सारे प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया गया है। महाकाल कॉरीडोर कैसे बनेगा यह ब्लू प्रिंट कमलनाथ सरकार ने जारी किया। अब इसको लेकर दोनों ही राजनीति दल अपने-अपने दावे कर रहे है। पटैरिया ने कहा कि कमलनाथ सरकार ने पुरानी स्कीम को ही आगे बढ़ाया था। कॉरीडोर का जमीन पर निर्माण कार्य भी शिवराज सरकार में शुरू हो गया और पहले चरण का काम भी पूरा हुआ है।
 
 
राम वन गमन पथ के लिए बनी थी कमेटी
पटेरिया के मुताबिक इससे पहले 2006 में पूर्व केंद्रीय मंत्री अनिल माधव दवे ने राम वनगमन पथ को डेवलप करने का प्रोजेक्ट अपने हाथ में लिया था। इसके लिए कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी थी। इसके बाद 2008 में श्रीलंका में सीता मंदिर बनाने के लिए बजट भी स्वीकृत किया गया था।

 सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान आया था विचार, एमपी सरकार ने किया साकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तय रणनीति के साथ धार्मिक महत्व व आस्था से जुड़े मंदिरों के कायाकल्प व विस्तार पर काम कर रहे हैं। मोदी ने मंगलवार को जिस महाकाल लोक का लोकार्पण किया, उसका सपना उन्होंने उज्जैन के सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान 2016 में देखा था।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कहते हैं, पहले बाबा केदारनाथ, फिर अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर का भव्य निर्माण का शुभारंभ हुआ। वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर को दिव्य-भव्य रूप से विकसित करने के साथ भगवान महाकाल लोक का निर्माण हुआ है। वह बताते हैं कि 2016 में सिंहस्थ महाकुंभ हुआ था। उसमें पीएम मोदी भी आए थे। तब एक विचार यह भी था कि श्रीमहाकाल महाराज का दर्शन करने दुनिया भर से लाखों लोग आते हैं। यहां ऐसी रचना होनी चाहिए जहां लोग भगवान  शिव की लीलाएं महाकाल प्रांगण में देख सकें। 

 
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