देश के बड़े नेताओं के बीज भैय्यूजी की पैठ बेहद मजबूत थी। वह मध्यप्रदेश के साथ देश के एक जाने माने चेहरे थे। एक समय ऐसा भी था जब महाराष्ट्र की राजनीति में कोई भी उथल पुथल होती थी तो मंत्री इंदौर की तरफ दौड़े चले आते थे। भैय्यूजी ने पीएम मोदी से लेकर अन्ना हजारे के साथ मंच साझा किया था।
साथ ही वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भी बेहद करीबी माने जाते थे। ऐसे में सबको इस बात की उम्मीद थी कि उनके अंतिम दर्शन के लिए मंत्री जरूर आएंगे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ उनकी अंतिम यात्रा में ना तो सीएम शिवराज पहुंचे और ना ही उनका कोई मंत्री पहुंचा। साथ ही लोगों को इस बात की भी उम्मीद थी कि भैय्यूजी की विदाई राजकीय सम्मान के साथ की जाएगी लेकिन आखिरी समय तक भी सरकार की ओर से ऐसी कोई कवायद नजर नहीं आई।
मौत के बाद भी मौत की वजह बरकरार रही
भैय्यूजी ने पारिवारिक कलह के चलते आत्महत्या की थी। लेकिन उनकी मौत के बाद भी उनकी मौत का ये कारण बरकरार रहा। भैय्यूजी को अस्पताल से उनके घर ले जाया गया। इसके बाद उनके सेवादार उनके पार्थिव शरीर को उनके सूर्योदय आश्रम ले गए। घर से आश्रम आने तक उनकी पत्नी डॉ. आयुषी और बेटी कूहु एक ही कार से गईं। इस दौरान उन्होंने ना तो एक दूसरे से बात की और ना ही एक दूसरे की ओर देखा। दोनों के बीच तनाव साफ दिखाई दे रहा था।
भैय्यूजी ने आश्रम की सारी जिम्मेदारी अपने सेवक विनायक को दे दी। इस बात का जिक्र उन्होंने अपने सूसाइड नोट में किया। विनायक पिछले 20 सालों से भैय्यूजी के संपर्क में थे। जब वह पहली बार भैय्यूजी से मिला तो वह बहुत प्रभावित हो गया और उनके घर के सदस्य जैसा ही बन गया।
नोट में भय्यूजी ने यह भी लिखा, 'मेरी सारी आर्थिक शक्तियां, प्रॉपर्टीज, बैंक अकाउंट्स की सारी जिम्मेदारी मेरे मरने के बाद विनायक संभालेगा। मैं विनायक पर विश्वास करता हूं। इसलिए उसे ये सारी जिम्मेदारी देकर जा रहा हूं और ये मैं बिना किसी दबाव के लिख रहा हूं।'