उप जिला निर्वाचन अधिकारी केआर बडोले और मुख्य निर्वाचन आयुक्त अनुपम राजन
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खंडवा में पदस्थ 123 डाक मतपत्र पुलिसकर्मियों के मतदान के लिए तय तारीख 17 नवंबर के दो दिन बाद सोमवार (20 नवंबर) को डाले गए। यही नहीं बताया जा रहा है कि जब यह वोट डाले जा रहे थे, तब नोडल अधिकारी ने जिला निर्वाचन अधिकारी को इसके संबंध में जानकारी देना भी उचित नहीं समझा, जिसके चलते अब यह मामला प्रदेश लेवल पर गरमा गया है। राजनीतिक पार्टियों को स्थानीय प्रशासन के खिलाफ एक नया मुद्दा मिल गया है। हालांकि, जिला प्रशासन ने अब इस मामले में चुनाव आयोग को अवगत करा दिया है और वहां से मिलने वाले दिशा-निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है।
दरअसल, प्रदेश में 17 नवंबर के दिन मतदान के लिए तय था। लेकिन यहां दो दिन बाद 20 नवंबर को 123 डाक मतपत्रों के जरिये मतदान करवाया गया था। बताया जा रहा है कि यह सभी डाक मतपत्र उन पुलिस कर्मियों के थे, जो प्रदेश के अलग-अलग जिलों से अपनी चुनावी ड्यूटी करने खंडवा में आए हुए थे। निर्वाचन आयोग की माने तो इन सभी मतपत्रों के जरिये किया गया मतदान भी 17 नवंबर से पहले ही किया जाना चाहिए था। हालांकि, जिले में ऐसा नहीं हो पाया और जब यहां के नोडल अधिकारी को इसके बारे में मालूम हुआ तो आनन-फानन में उन्होंने स्थानीय निर्वाचन अधिकारी को बताए बगैर 20 नवंबर को 123 लोगों का मतदान डाक मतपत्रों से करवा दिया।
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर खंडवा के उप जिला निर्वाचन अधिकारी केआर बडोले ने बताया कि यह सभी वोट दूसरे जिले के मतदाताओं के हैं, जो यहां पर पदस्थ हैं। पुलिसकर्मियों के रूप में, जो की 20 तारीख को डाले गए हैं। यहां पर 123 लोगों की वोटिंग पोस्टल बैलट के रूप में की गई है और सारी वस्तु स्थिति के संबंध में आयोग को भी अवगत करा दिया गया है। आयोग से जो भी दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, उसके अनुसार आगे कार्रवाई की जाएगी।
मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त अनुपम राजन से मीडिया ने जब सवाल किया कि, खंडवा में पोस्टल बैलट को लेकर दो दिन बाद वोटिंग होती है। इसको लेकर केंद्रीय चुनाव आयोग से किसी तरह के दिशा-निर्देश मांगे गए हैं। तब उन्होंने इससे इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने किसी तरह के सजेशन तो नहीं मांगे हैं। लेकिन खंडवा में जो हुआ है, उसकी रिपोर्ट उन्होंने भेज दी है। वहां मतदान दिनांक के बाद कुछ पुलिसकर्मियों के वोट डाले गए हैं, वह अलग रखे गए हैं। आयोग का जैसा भी निर्देश होगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उन्होंने इन मत पत्रों को शून्य माने जाने के सवाल पर कहा कि इस संबंध में अभी आयोग के दिशा-निर्देशों की प्रतीक्षा है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके द्वारा सारी वस्तु स्थिति आयोग के समक्ष रख दी गई है। अब वहां से जैसे निर्देश मिलेंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।