फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Loksabha Election: 26 साल बाद कांग्रेस का इंदौर में नया चेहरा,अक्षय पहली बार लड़ेंगे चुनाव

Sun, 24 Mar 2024 07:56 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

अक्षय बम कांग्रेस की छात्र राजनीति में काफी सक्रिय रहे। विधानसभा चुनाव में उन्होंने चार नंबर सीट से टिकट मांगा था। उन्होंने क्षेत्र में टिकट की उम्मीद में कई अभियान भी शुरू कर दिए थे, लेकिन टिकट नहीं मिल सका। अब लोकसभा में उन्हें टिकट दिया गया।
विज्ञापन
अक्षय का कांग्रेस नेता स्वागत करते हुए। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इंदौर लोकसभा सीट पर 35 सालों से कांग्रेस जीत दर्ज नहीं करा पाई। कांग्रेस ने 9 मर्तबा पूर्व मेयर, पूर्व विधायकों को आजमाया, लेकिन वे चुनाव नहीं जीत पाए। 26 साल बाद कांग्रेस ने भाजपा को चुनौती देने के लिए नए चेहरे पर दांव लगाया है। अक्षय अभी तक न पार्षद का चुनाव जीते है और न विधायका का। उन्हें सीधे लोकसभा उम्मीदवार का टिकट पार्टी ने दिया है।

विज्ञापन


वर्ष 1898 में भी कांग्रेस ने पंकज संघवी को सुमित्रा महाजन के सामने उम्मीदवार बनाया था। संघवी को कांग्रेस ने पहली मर्तबा लोकसभा का टिकट दिया था। उन्होंने महाजन को अच्छी टक्कर दी, लेकिन चुनाव नहीं जीत सके। संघवी से पहले कांग्रेस ने महापौर मधुकर वर्मा को लोकसभा चुनाव का उम्मीदवार बनाया था। वे भी चुनाव नहीं जीत पाए थे।

45 साल के अक्षय का पहला चुनाव

अक्षय बम कांग्रेस की छात्र राजनीति में काफी सक्रिय रहे। विधानसभा चुनाव में उन्होंने चार नंबर सीट से टिकट मांगा था। उन्होंने क्षेत्र में टिकट की उम्मीद में कई अभियान भी शुरू कर दिए थे, लेकिन टिकट नहीं मिल सका। अब लोकसभा में उन्हें टिकट दिया गया,क्योकि दूसरे नेता चुनाव लड़ना नहीं चाहते थे। 45 वर्षीय अक्षय का यह पहला चुनाव है। नया चेहरा होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में उन्हें पहचान का संकट झेलना पड़ सकता है।

63 वर्षीय भाजपा उम्मीदवार शंकर लालवानी दूसरी मर्तबा चुनाव मैदान में है, हालांकि उन्हें भी कई क्षेत्रों में एंटी इंकमबैंसी फेक्टर का सामना करना पड़ सकता है,क्योकि कई बड़े प्रोजेक्ट तय समय में जमीन पर नहीं पा पाए। वेस्टर्न रिंग रोड के लिए जमीन अधिग्रहण का भी 20 से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध हो रहा है और भाजपा को चुनाव में ग्रामीणों की नाराजगी झेलना पड़ सकती है।

जातिगत समीकरण के कारण अक्षय का नाम आगे

अक्षय जैन समाज से आते है। इंदौर में जैन समाज का वोटबैंक भी है। जैन समाज के खाते में टिकट आने के कारण समाज के लोग भी चुनाव में अक्षय की  आर्थिक रुप से मदद कर सकते है।

विज्ञापन


वैसे अक्षय खुद संपन्न परिवार से है। टिकट तय करने वाले नेताअेां का मानना था कि अक्षय चुनावी अभियान में भाजपा से कमतर नहीं साबित होंगे। राऊ क्षेत्र के खाती वोटबैंक से भी अक्षय को मदद की उम्मीद है,क्योकि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी खाती समाज से है और वे भी क्षेत्र में अक्षय के लिए चुनाव प्रचार के लिए सक्रिय हो सकते है।

 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें