अपने खेत में प्याज की बिछी हुई फसल के साथ गोविंद।
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बारिश और ओलावृष्टि ने मप्र में न सिर्फ गेहूं बल्कि प्याज, लहसुन और कलोंजी की फसल भी बर्बाद हुई। जिन किसानों ने बेहतर आय के लिए कई अन्य फसलों को भी लगाया था वह भी इस भीषण मौसम परिवर्तन की मार का शिकार हो गए। गणेशपुर के किसान गोविंद पाटीदार ने बताया कि गेहूं के साथ उनकी प्याज, लहसुन और कलोंजी की फसल भी बर्बाद हो गई। गोविंद ने बताया कि लगातार गिर रहे पानी ने गेहूं को तो पूरी तरह से खराब कर दिया है। जो बचा हुआ दाना है वह भी नहीं निकाल पा रहे क्योंकि पानी लगातार गिर रहा है। वहीं प्याज, लहसुन और कलोंजी पर गिर रहे ठंडे पानी ने उसे भी खराब कर दिया है।
गोविंद ने बताया कि एक बीघा में 80 क्विंटल के आसपास प्याज निकलता है। इस बार मौसम में बदलाव की वजह से 30 क्विंटल ही प्याज हुआ। इसे 11 हजार रुपए में मंडी में बेचा। एक बीघा में प्याज लगाने की कीमत 24 हजार रुपए आई। इसमें सात हजार रुपए लगवाई, पांच हजार का बीज और गीले खेत में 12 हजार रुपए निकलवाने में लगे। हाथ में 11 हजार रुपए आए यानी 13 हजार का नुकसान हुआ।
खाद-बीज पर ब्याज का डर सता रहा
गोविंद ने बताया कि सोसायटी से जो खाद और बीज लिए हैं उनके पैसे जमा करना हैं। पैसे जमा करने के लिए सरकार ज्यादा से ज्यादा अप्रैल अंत तक का समय देती है। यदि अप्रैल तक पैसे जमा नहीं हुए तो सालभर का ब्याज लग जाता है। ऐेसे में किसान को जो कीमत मिलेगी वह उस पर माल बेचकर पहले बीज और खाद का पैसा वापस करेगा।
दस लाख का नुकसान
गोविंद ने बताया कि इस फसल में कम से कम दस लाख रुपए का नुकसान हुआ है। इसमें हमारी लागत भी नहीं निकलेगी। गोविंद ने कहा कि सालभर कैसे निकलेगा अब सबके सामने यही सवाल है।