तेज बारिश से खेतों में रखी फसल खराब हो गई।
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मालवा-निमाड़ में गेंहू की फसलों को दो-तीन दिन से हो रही बारिश और ओलावृष्टी नुकसान पहुंचाया है। पानी से गेंहू का रंग फीका पड़ गया है और किसानों के चेहरे भी मुरझा गए है। इस बार खेतों मेें गेंहू की पैदावार तो भरपूर हुई, लेकिन खड़ी फसल के पानी में भीगने के कारण उसकी मंडी में पूछ-परख कम हो जाएगी।
किसानों को भी भाव ठीक नहीं मिलेंगे। इंदौर संभाग में जहां-जहां बारिश हुई है, वहां 15 से 25 प्रतिशत तक खेतों में फसलों को नुकसान हुआ है। गेंहू की फसल किसी खेत में कटने के लिए तैयार थी तो किसी खेत में कटकर रखी हुई थी। दोनो ही स्थिति में किसानों को नुकसान हुआ है। इंदौर संभाग के खरगोन, सेंधवा, धार, झिरन्या, खंडवा में गेंहू, चना और प्याज की फसलों को बारिश की वजह से नुकसान हो गया है। बारिश की मार झेलने के बाद किसान दूसरे किसानों से मालवी में पूछ रहे है कि - तमारे गेंहू आड़ा तो नी पड़या...।
नुकसान देखने के लिए अफसरों का दौरा
इंदौर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश और ओले गिरने से हुए नुकसान का आंकलन करने के लिए कृषि विभाग के अफसर सोमवार को गांवों की तरफ रवाना हुए। कृषि विभाग के उपसंचालक एसएस राजपूत ने बताया कि सर्वे के बाद हम रिपोर्ट तैयार कर भोपाल भेजेंगे। इंदौर में सांवेर, देपालपुर में फसलों को काफी नुकसान हुआ है। गेंहू अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक एके सिंह के अनुसार पानी के कारण बालियों का रंग काला हो जाएगा। इसके अलावा गेंहू की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी।