इंदौर संसदीय क्षेत्र में 35 सालों से कांग्रेस जीत दर्ज नहीं करा पाई।
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कभी कांग्रेस का गढ़ रही इंदौर लोकसभा सीट पर बीते 35 सालों से भाजपा का कब्जा है। कांग्रेस ने इन सालों में कई प्रयोग किए। युवा से लेकर अनुभवी उम्मीदवारों को मौका दिया, लेकिन जीत नहीं मिली।
लगातार 9 बार मिली हार के बाद कांग्रेस इंदौर सीट पर मुकाबला बराबरी का चाहती है और नया चेहरा खोज रही है। 9 में सात बार भाजपा की जीत का अंतर एक लाख से ज्यादा रहा, लेकिन 1998 व 2009 के चुनाव में भाजपा की लीड 50 हजार से कम रही।
2009 के लोकसभा चुनाव में तो लीड 11 हजार 480 वोटों पर सिमट गई थी। तब कांग्रेस ने सत्यनारायण पटेल को उम्मीदवार बनाया था। उसके बाद के दोनो चुनावों में लीड का अंतर चार लाख से ज्यादा रहा।
खास बात यह है कि 9 मेें से 8 मर्तबा एक ही संसदीय क्षेत्र से लगातार चुनाव जीत कर पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने एक रिकार्ड बनाया। देश में एक सीट से लगातार चुनाव किसी उम्मीदवार ने नहीं जीता।
इस बार कांग्रेस की तरफ से पूर्व विधायक संजय शुक्ला, विशाल पटेल, अरविंद बागड़ी के नाम चर्चा में हैै। अभी उम्मीदवार का नाम तय नहीं हुआ है। उधर भाजपा की तरफ से किसी ने दावेदारी नहीं की है। माना जा रहा है कि सांसद शंकर लालवानी को जातिगत समीकरणों के हिसाब से भाजपा दोबारा अपना उम्मीदवार बना सकती है।
सेठी से छिनी थी महाजन ने सीट
1989 में भाजपा ने सुमित्रा महाजन को टिकट दिया था। उन्होंने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाशचंद्र सेठी को चुनाव हराकर कांग्रेस से यह सीट छिनी थी।1991 में ललित जैन को 3 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से महाजन ने हराया।
इसके बाद 1996 में मधुकर वर्मा, 1998 में पंकज संघवी, 1999 में महेश जोशी, 2004 में रामेश्वर पटेल हराया था, लेकिन वर्ष 2009 में महाजन सबसे कम वोटों के अंतर से जीती। तब लीड का अंतर 11 हजार तक रह गया था।
कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार 2014 में पटेल को उम्मीदवार बनाया, लेकिन तब उन्हे महाजन ने 4 लाख 66 हजार वोटों के अंतर से हराया। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने शंकर लालवानी को टिकट दिया था और वे पांच लाख के वोटों की लीड से चुनाव जीते।