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Indore News:30 सालों बाद मजदूरों को जागी हक का पैसा मिलने की उम्मीद, निकले खुशियों के आंसू

Sun, 22 Oct 2023 07:33 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

वर्षों से श्रमिक इस इंतजार में इस बैठक में आते थे कि कभी तो उनके हक मेें फैसला आएगा। हाल ही में हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से ब्याज सहित राशि देने के दस्तावेज पेश किए गए। 
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30 साल बाद श्रमिकों को मिलेेगा उनके हक का पैसा। - फोटो : amar ujala digital
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विस्तार
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इंदौर मेें 30 साल पहले बंद हुई हुकमचंद मिल के श्रमिकों की 1641 वीं बैठक खुशियों भरी रही। जैसे ही श्रमिक नेता नरेंद्र श्रीवंश ने  बैैठक में बताया कि मजदूरों और उनके परिवारों को ब्याज सहित 218 करोड़ रुपये मिलेंगे और इसकी प्रक्रिया भी जल्दी ही शुरू होने जा रहा है। यह सुनते ही झुरियों से भरे श्रमिकों के चेहरे पर चमक आ गई और मुस्कान खिल उठी। श्रमिक परिवार की कुछ महिलाएं भी बैठक में शामिल थीं। उनमें से कुछ की आंखों में खुशी के आंसू भी नजर आए।
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वर्षों से श्रमिक इस इंतजार में इस बैठक में आते थे कि कभी तो उनके हक मेें फैसला आएगा। दरअसल हाल ही में हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से ब्याज सहित राशि देने के दस्तावेज पेश किए गए और  बताया गया कि जल्दी ही मजदूरों को उनका पैसा दिया जाएगा। 

 हुकमचंद मिल मजदूर कर्मचारी अधिकारी के अध्यक्ष नरेन्द्र श्रीवंश ने बताया कि हुकमचंद मिल के श्रमिकों की ऐतिहासिक जीत हुई है। देश की अन्य किसी भी कपड़ा मिल मे इतना बड़ा क्लेम नहीं मिला। यह हमारी मेहनत की जीत है,क्योकि श्रमिकों ने लगातार संघर्ष जारी रखा। बैठक में बताया गया कि दो साल पहले  62 करोड़ रुपये मिल मजदूरों को मिले थे और अब ब्याज सहित 218 करोड़ रुपये और मिलेंगे। गृह निर्माण मंडल इस जमीन पर प्रोजेक्ट को मूर्त रुप देगा।
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दो हजार से ज्यादा मजदूरों की मौत
हुकमचंद मिल 30 साल पहले बंद हुई थी। वर्षों तक मजदूरों को उनके हक का पैसा मिल प्रबंधन ने नहीं दिया। श्रमिकों ने कोर्ट में लड़ाई लड़ी। 30 सालों में  2 हजार से ज्यादा  श्रमिकों की मौत हो गई अौर 60 से ज्यादा श्रमिकों ने आत्महत्या कर ली। जो मजदूर मर गए, उनके परिवारों ने भी श्रमिकों की लड़ाई में साथ दिया और हर रविवार मिल परिसर में होने वाली बैठक में वे आते रहे। चाहे गर्मी हो या बरसात, श्रमिकों की बैठक का सिलसिला कभी नहीं टूटा।  

42 एकड़ जमीन है मिल की 

हुकमचंद मिल की 42 एकड़ जमीन है। पहले मिल की जमीन बिकने की कोशिश हुई, लेकिन कोई खरीददार आगे नहीं आया। फिर सरकार ने मिल की जमीन पर अपना हक जताया और कोर्ट में श्रमिकों को उनका पैसा देने की बात कही। मिल पर श्रमिकों के अलावा कुछ बैंकों का भी बकाया है। जिसे सरकार चुकाएगी।हाऊसिंग बोर्ड के अफसर मिल की जमीन देख चुके है। अगले साल इस जमीन पर प्रोजेक्ट आकार लेने लगेगा।
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