महाकाल मंदिर में भक्तों द्वारा दान में दी गई राशि वीवीआईपी पर दिल खोलकर खर्च की जा रही है। इसका खुलासा विधानसभा में कांग्रेस विधायक महेश परमार द्वारा महाकाल ट्रस्ट द्वारा किए गए खर्च का ब्यौरा मांगे जाने पर हुआ। विधानसभा में पर्यटन मंत्री उषा ठाकुर ने पांच साल के खर्च का हिसाब दिया।
पांच माह पहले उज्जैन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आए थे। उनके आगमन पर खर्च की गई राशि का ब्यौरा भी उसमें शामिल था। परमार के अनुसार भक्तों ने जो राशि दान में दी। उसका खर्च भक्तों की सुविधाएं बढाने पर होना चाहिए,जबकि उसका खर्च दूसरे कामों पर हो रहा है। ट्रस्ट ने 60 लाख रुपये कोविंद के आगमन के पहले किए गए कामों पर खर्च किए गए। उसमें 10 लाख रुपये रेड कारपेट कारपेट पर खर्च हुए।
फूलों पर ढाई लाख खर्च
कोविंद के आगमन पर मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया था। इस पर ढाई लाख रुपये की राशि खर्च हुई है। 40 लाख रुपये नंदी हाल से निर्गम द्वार तक सिर्फ सजावट में खर्च हुए। इसके अलावा छह लाख से ज्यादा की राशि कवर जूट मेट खरीदने पर खर्च की गई। आगमन के लिए प्रधानमंत्री व मु्ख्यमंत्री राहत कोष से पांच लाख रुपये और रेडक्रॉस सोसायटी से 10 लाख रुपये की राशि दी गई।
आगमन के दौरान मंदिर परिसर में रेड कारपेट बिछाया गया था। इसके अलावा अन्य काम भी हुए। परमार ने मंदिर में बांटे जाने प्रसाद के पैकेट पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पैकेट पर शिखर का फोटो है,जबकि प्रसाद खत्म होने के बाद पैकेट फेंक दिया जाता है। इससे शिखर का अपमान होता है।