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इंदौर: कलेक्टर को बच्चों ने बताई समस्याएं तो लोन भरने के लिए हाथोंहाथ दिया चेक... किरायेदार से दिलवाया मकान का कब्जा

Sat, 06 Nov 2021 04:57 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने उन बच्चों से संवाद किया, जिन्होंने कोविड-19 की वजह से अपनी माता या पिता या दोनों को खो दिया है। 
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इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह कोविड-19 में माता-पिता खोने वाले बच्चों की परेशानियों को सुना। तत्काल निराकरण भी किया। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 सर, कोरोना में माता-पिता का निधन हो गया है। जिस किराएदार को मकान किराए पर दिया था उसने कब्जा कर लिया है। बहुत परेशानी आ रही है...प्लीज मदद कीजिए सर। सर...मेरे पापा ने वाहन पर लोन लिया था, उसकी किश्त बची हुई है। क्या आप सहायता कर सकते हैं... ये मासूम-सी समस्याएं थी उन बच्चों की जिनके सिर से कोरोना में माता-पिता का साया उठ गया। अब वे अकेले हैं। आंखों में सपने हैं और कांधे पर बोझ, मगर हौसले के सहारे जी रहे हैं। ऐसे बच्चों के लिए यह दीपावली कुछ सौगातें लेकर आई, जब कलेक्टर मनीष सिंह ने उनको सहारा दिया और उनकी मदद के लिए आगे हाथ बढ़ाया।
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कलेक्टर ने किया बच्चों से संवाद
दरअसल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर इंदौर जिले में मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना के हितग्राही बच्चों के लिए कलेक्टर कार्यालय में कार्यक्रम रखा गया था। कार्यक्रम में उपस्थित कलेक्टर मनीष सिंह ने निराश्रित बच्चों से संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनी। मनीष सिंह ने अनेक बच्चों की समस्याओं का हाथों-हाथ निराकरण भी किया। गांधीनगर निवासी काजल पवार ने बताया कि उसके माता पिता की मृत्यु कोरोना से हुई है। वह तीन बहन और एक भाई है। उनके मकान पर किराएदार ने कब्जा कर रखा है। कलेक्टर मनीष सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कब्जेदारों से तुरंत मकान खाली कराया जाए।

लोन चुकाने दिया चेक 
अदिति बोरासी ने बताया कि उसके माता-पिता की मृत्यु भी कोविड से हो गई है। उन्होंने जो वाहन लोन पर लिया गया था उसका साढ़े 16 हजार रुपए बकाया है। कलेक्टर ने वाहन का लोन चुकता करने के लिए साढ़े 16 हजार रुपए का चेक बालिका को दिया। इसी तरह राऊ के अशोक विहार में रहने वाले आकाश सिंह ने बताया कि उसके माता-पिता की मृत्यु भी कोरोना से हुई है। उन्होंने मकान बनाने के लिए लगभग 15 लाख रुपए का लोन लिया था। इसमें से अभी 14 लाख रुपए बकाया है। मैं पढ़ाई कर रहा हूं। लोन भरने में असमर्थ हूं। अगर लोन नहीं भरा तो रहने की समस्या हो जाएगी। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि संबंधित बैंक से चर्चा की जाए और जन सहयोग से राशि एकत्रित कर इनके लोन को चुकता किया जाए। बच्चों को मिठाइयां और उपहार भी दिए गए।
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