अवैध निर्माण ढहाया (file photo)
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इंदौर में इन दिनों जमीन कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। नियमों को धता बताकर मनमानी और गड़बड़ी करने वाले परेशान हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ प्रशासन सख्त हुआ है। कलेक्टर ने साफ कह दिया है कि जमीनों, प्लॉट के संबंध में आम लोगों से धोखाधड़ी करने वाले कॉलोनाइजर, दलाल, एजेंट के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज होंगे।
दरअसल इंदौर में बीते कुछ समय से जमीनों की हेराफेरी की शिकायतें मिल रही है। बिना अनुमति के शासकीय भूमि को बेचा जा रहा है तो बिना किसी अनुमति के निर्माण तक किए जा रहे हैं। डायरी में लेनदेन किया जा रहा था। इस पर प्रशासन ने पिछले दिनों बड़ी कार्रवाई कर करोड़ों की भूमि से कब्जा हटाया था और शासकीय घोषित की थी। कुछ दलालों के गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे।
गड़बड़ी की तो दर्ज होगा आपराधिक मामला
अब इस मामले में प्रशासन बड़ी कार्रवाई का मन बन रहा है। कलेक्टर मनीष सिंह ने इंदौर जिले के सभी अपर कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देश दिए हैं कि सादी डायरी व अन्य अनाधिकृत तरीकों से किए जा रहे विक्रय के संबंध में खरीदारों के अधिकारों का संरक्षण करें और यह सुनिश्चित किया जाए कि उनके साथ डायरी आधारित धोखाधड़ी न हो। ऐसे कॉलोनाइजर, दलाल, एजेंट जो किसी भी प्रकार से आमजन के साथ धोखाधड़ी करते हुए पाए जाएं उसकी विस्तृत राजस्व जांच करें। प्रतिवेदन तैयार कर संबंधित अपर कलेक्टर से अनुमोदन लेकर संबंधित थाने में भारतीय दण्ड संहिता की सुसंगत धाराओं में आपराधिक प्रकरण दर्ज करवाया जाए।
कॉलोनियों का करते रहें भ्रमण
कलेक्टर ने कहा है कि संबंधित क्षेत्र में विकसित हो रही कॉलोनियों का भ्रमण करते रहे। वहां पर उपस्थित हितग्राहियों से चर्चा करें कि उन्हें किसी प्रकार को समस्या तो नहीं है। अपने स्वयं के सूचना तंत्र से, ऐसे कॉलोनाईजर्स की जानकारी एकत्र करें जो खुद की वित्तीय क्षमता (हैसियत) से अधिक वित्तीय भार वाली कॉलोनी में संलिप्त होकर अवैध डायरियों आदि के धंधे में स्वयं एवं अपने दलालों के साथ संलिप्त है। डायरी पर विक्रय के संबंध में किसी भी हितग्राही की कोई शिकायत आती है तो उसे लिखित में प्राप्त करें, ऐसी शिकायत पर कॉलोनाइजर और उनके दलालों से पूछताछ करें। शिकायतकर्ता को कम समय में न्याय दिलवाएं। गलत कार्य करने वाले कॉलोनाइजर, दलालों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाए। सभी दलालों का रेरा पंजीयन होना अनिवार्य है। बिना इस पंजीयन के अगर कोई दलाली करता पाया जाता है तो उसके विरुद्ध प्रभावी वैधानिक कार्यवाही की जाना सुनिश्चित की जाए।