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MP High Court: मिहिर भोज प्रतिमा विवाद में हाईकोर्ट की सलाह, कहा- महापुरुषों को किसी जाति में बांधना उचित नहीं

Thu, 04 Jan 2024 03:26 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर

सार

बहुचर्चित हुए सम्राट मिहिर भोज प्रतिमा विवाद को लेकर बुधवार को मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में सुनवाई हुई। युगलपीठ ने कहा कि राजा की कोई जाति नहीं होती है। दोनों समाज मिलकर इस मामले के विवाद का निराकरण करें, वर्ना फिर कोर्ट इस पर फैसला करेगा।
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मिहिर भोज प्रतिमा विवाद - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बुधवार को संभागीय आयुक्त को निर्देशित कर कहा है कि सम्राट मिहिर भोज प्रतिमा को लेकर चल रहे विवाद में दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत का रास्ता निकालें। साथ ही उन्हें सम्राट मिहिर भोज को जाति सूचक शब्द से अलग रखने की समझाइश दें। क्योंकि महापुरुषों को किसी जाति तक सीमित करना उचित नहीं है। महापुरुष सभी जातियों के होते हैं। अब इस मामले पर सुनवाई फरवरी के तीसरे सप्ताह में नियत की गई है।

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गौरतलब है कि सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा चिरवाई नाके पर स्थापित की गई थी। प्रतिमा के नीचे पहले गुर्जर सम्राट मिहिर भोज की पट्टिका लगी थी। इस पर क्षत्रिय समाज को आपत्ति थी। क्षत्रिय समाज का कहना है कि सम्राट मिहिर भोज क्षत्रिय थे। जबकि गुर्जर यह मानने के लिए तैयार नहीं है। उनका कहना है देश के कई हिस्सों में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा लगी है, जिस पर गुर्जर शब्द पूर्व से अंकित है। ऐसे में ग्वालियर के चिरवाई नाके पर लगाई गई प्रतिमा के नीचे गुर्जर सम्राट मिहिर भोज का लिखा जाना कोई नई बात नहीं है।

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इसे लेकर क्षत्रिय समाज और गुर्जर समाज के बीच तनाव उत्पन्न हो गया था। इस बीच हाईकोर्ट ने एक आदेश जारी कर प्रतिमा के नीचे लिखे गुर्जर सम्राट मिहिर भोज की पट्टिका को ढकवा दिया था। वह अभी भी पुलिस के पहरे में है। दो समाजों के बीच उपजे तनाव को देखते हुए एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई लंबित है।

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