मतदान दिवस 17 अप्रैल को भोपाल पहुंचने पर बाबा रामदेव को पुलिस ने भाषण और प्रेस कांफ्रेंस से रोक दिया। बाद में बाबा को गंजबासौदा और नसरुल्लागंज जाकर भाषण और प्रेस कांफ्रेंस करना पड़ा।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार बाबा के समर्थकों व स्वाभिमान मंच ने एक दिन पहले ही बाबा रामदेव की प्रेस कांफ्रेंस का निमंत्रण पत्रकारों को भेजा गया था।
लेकिन बाबा रामदेव जब गुरुवार सुबह राजा भोज हवाई अड्डे पर पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
प्रेस कंफ्रेंस के लिए दूसरी जगह गए बाबा
बाबा रामदेव को प्रेस कंफ्रेंस से रोकने के पीछे पुलिस का तर्क था कि भोपाल में मतदान का दिवस है, कोई भी बाहरी व्यक्ति या नेता वहां न भाषण दे सकता है और न ही कांफ्रेंस कर सकता है।
अंत में बाबा रामदेव ई-4 अरेरा कालोनी के एक आवास पर पहुंचे। वहां से वह हेलीकाप्टर के माध्यम से नसरुल्लागंज और गंजबासौदा पहुंच गए और वहां भाषण व प्रेस कांफ्रेंस दोनों की। वह देर रात मथुरा रवाना होन वाले थे।
पूर्व मंत्री सहित उम्मीदवारों को भी पुलिस ने दिनभर बैठाया
मध्य प्रदेश में पुलिस ने मतदान के दिन हैरतअंगेज काम कर दिया। मुरैना लोकसभा क्षेत्र के तीन उम्मीदवारों को सुबह ८ बजे से ही पुलिस कंट्रोल रूम और फिर एक होटल में बैठा दिया।
इनमें मध्य प्रदेश के दो पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा और डॉ. गोविंदसिंह शामिल हैं। दोनों ही ग्वालियर डिवीजन के दबंग नेता हैं। अनूप मिश्रा, पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के भानजे हैं। तीसरे उम्मीदवार बसपा के वृंदावनसिंह सिकरवार हैं।
पुलिस के आला अधिकारियों ने बताया कि यह कदम एहतियातन और उम्मीदवारों की सहमति से उठाया गया है।
नेताओं ने नजरबंद रखने की बात को नकारा
तीनों उम्मीदवारों ने इन खबरों को गलत बताया कि उन्हें निरुद्ध किया गया है। अनूप मिश्रा ने कहा कि चुनाव आयोग को सुधारों के तहत यह प्रावधान ही कर देना चाहिए कि उम्मीदवार बूथों पर जाए ही नहीं ताकि कार्यकर्ता उत्तेजित न हों। आपस में भिड़ें नहीं।
डॉ. गोविंद सिंह ने टीवी पर चल रही खबरों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि उनके पास अनूप मिश्रा की फोन आया था। अनूप मिश्रा उनके मित्र हैं। मिश्रा ने कहा कि चुनाव प्रशासन चाहता है कि उम्मीदवार साथ बैठें ताकि कोई प्रशासनिक समस्या न आए।
सिंह ने कहा कि नजरबंद रखने वाली बात निराधार है। सिंह ने यह भी कहा कि इतनी हिम्मत किसी में नहीं है कि वह उन जैसे लोगों को नजरबंद करे। कांग्रेस छोड़कर बसपा में गए वृंदावन सिकरवार ने पहले कहा था कि पुलिस ने उन लोगों को नजरबंद जैसी स्थिति में रखा है।
सहमति से बैठे रहे नेता
बाद में सिकरवार ने कहा कि वे भी सहमति के आधार पर बैठे हैं। सिकरवार पहले कांग्रेस का ही टिकट मांग रहे थे। कांग्रेस का टिकट नहीं मिलने पर वे बसपा के टिकट पर खड़े हो गए।
अनुमान है कि सिकरवार कांग्रेस के पंरपरागत दलित वोटबैंक को ही प्रभावित कर डॉ. गोविंदसिंह को नुकसान पहुंचाएंगे।
भिंड और मुरैना मध्य प्रदेश के ऐसे इलाके हैं जहां चुनावी हिंसा की घटनाओं का इतिहास रहा है। हाल ही में मुरैना में एक हत्या की घटना हुई थी। उस समय काफी तनाव पैदा हो गया था। पुलिस ने इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर यह कदम उठाया। बाद में तीनों ही उम्मीदवारों ने होटल में जाकर साथ ही भोजन किया।