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उज्जैन में गधों का मेला: कंगना और आर्यन ढोएंगे ईंटें, दोनों 34 हजार में बिके, वैक्सीन 14 हजार का!

Fri, 19 Nov 2021 04:30 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

उज्जैन में गधों का मेला लगा है। कंगना और आर्यन नाम के गधे 34 हजार रुपये में बिके हैं। अन्य कई नस्लों के गधे भी मेले में बिकने आए हैं।
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उज्जैन में कंगना और आर्यन नाम के गधे बिकने आए। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आइये, आपको मिलवाते हैं कंगना और आर्यन से। ये इन दिनों उज्जैन में है और गधों के बीच ही रह रहे हैं। इनकी कीमत लग रही है। कंगना और आर्यन, दोनों को 34 हजार रुपये में खरीदा गया है और इन्हें ईंट ढोने का काम करना है। चौंकिये मत...बात हो रही है गधों की जो इन दिनों उज्जैन के मेले में सबके आकर्षण का केंद्र है।
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दरअसल, उज्जैन में गधों के मेले की परंपरा है। पिछले साल कोरोना की वजह से यह मेला नहीं लग पाया था लेकिन इस बार मेला लगा है। मेले में जो गधे आए हैं उनके रोचक नाम रखे गए हैं। एक गधे का नाम कंगना है तो दूसरे का आर्यन। वैक्सीन नाम का गधा भी यहां है। कंगना और आर्यन को 34 हजार रुपए में एक ईट-भट्टा व्यापारी ने खरीदा है। वैक्सीन नाम के गधे के दाम 14 हजार रुपये है। कई नस्ल के गधे भी मेले में बिकने आए हैं। कुछ घोड़े भी हैं। इनमें  भूरी नाम की घोड़ी और बादल नाम को घोड़ा है। जिनकी कीमत एक लाख रुपये से ज्यादा है। मेले से खरीदे जाने वाले गधे माल ढुलाई में इस्तेमाल होते हैं। ज्यादातर को ईंट-भट्टों पर लगाया जाता है।  

पांच हजार से 30 हजार रुपये तक बिकते हैं गधे
दरअसल उज्जैन के कार्तिक मेला मैदान पर हर साल गधों का मेला लगता है। इस साल 15 नवंबर से मेला शुरू हुआ। मेला लगने से पहले ही गधों का उज्जैन आना शुरू हो गया था। खरीदने और बेचने वाले दोनों उज्जैन पहुंच गए थे। उज्जैन के अलावा आसपास के जिलों और महाराष्ट्र, राजस्थान जैसे राज्यों के जिलों से भी लोग आते हैं। बरसों से यह मेला लगता आ रहा है जो देव प्रबोधिनी एकादशी से कार्तिक माह की पूर्णिमा तक चलता है। इस साल 20 नवंबर तक मेला रहेगा। मेले में गधों की उम्र के हिसाब से कीमत तय होती है। अमूमन पांच हजार से लेकर 30 हजार रुपये तक में गधे बिकते हैं। कोरोना का असर मेले पर भी पड़ा है। बीते सालों से इसमें गधों की संख्या कम होती जा रही है।  
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