दमोह के डॉक्टरों ने भी हड़ताल शुरू कर दी है।
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दमोह जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टर बुधवार से प्रदेश व्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को खासतौर पर इलाज उपलब्ध न होने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टर कह रहे हैं कि यदि सरकार को मरीजों की इतनी चिंता है, तो उन्हें हमारी मांगे मान लेनी चाहिए, क्योंकि अस्पताल सरकार का है हमारा नहीं, इसलिए अब व्यवस्थाएं सरकार जुटाए।
दमोह में हड़ताल की अगुवाई कर रहे जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ. विशाल शुक्ला का कहना है कि सरकार ने उनकी एक मांग मानी थी उसे भी अब वापस ले लिया है, इसलिए अब यह लड़ाई उनके आत्मसम्मान की हो गई। अब हम सभी तभी हड़ताल से वापस लौटेंगे, जब हमें लिखित आश्वासन मिलेगा। उन्होंने कहा कि मरीजों को समस्या हो रही है तो सरकार उनकी व्यवस्था जुटाए। क्योंकि अस्पताल सरकार के हैं, हमारे नहीं और वैसे भी हमारे हड़ताल पर जाने से कोई खास असर नहीं पड़ने वाला। सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर आयुष विभाग के डॉक्टर्स की टीम को अस्पतालों में तैनात कर दिया है।
अपना इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंच रहे मरीज परेशान हो रहे हैं। बटियागढ़ क्षेत्र का एक युवक अपने पिता नन्हे भाई को लेकर जिला अस्पताल पहुंचा। डॉक्टर्स ना होने के कारण परेशान हो रहा था। उसने बताया कि अचानक रात में पिता की तबीयत बिगड़ जाती है। गले में खाना फंस जाता है। बटियागढ़ लेकर पहुंचे थे वहां कोई व्यवस्था नहीं। सोचा कि जिला अस्पताल ले जाएंगे, लेकिन यहां भी डॉक्टर नहीं हैं। डॉक्टरों की हड़ताल को देखते हुए दमोह कलेक्टर मयंक अग्रवाल जिला अस्पताल पहुंचे और जानकारी ली उन्होंने पांच पटवारियों की ड्यूटी भी जिला अस्पताल में लगाने के निर्देश दिए हैं।