बायं ओर पूर्व मंत्री दशरथ सिंह, दाएं ओर पूर्व मंत्री रत्नेश सालोमन
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दमोह जिले की जबेरा विधानसभा पर कांग्रेस का कब्जा रहा और यहां से पूर्व मंत्री स्व रत्नेश सालोमान का दबदबा रहा। उनके निधन के बाद यहां से उपचुनाव में दो बार भाजपा के दशरथ सिंह को विजय हासिल हुई और वह 2011 के उप चुनाव में जीतने के बाद मंत्री भी बने, लेकिन मुख्य चुनाव में हमेशा हार का सामना करना पड़ा।
1990 से 93 तक बीजेपी के बुग्गे भैया (ओम प्रकाश राय) विधायक रहे। इसके बाद पुनः रत्नेश सालोमन 1993 से 2003 तक कांग्रेस से विधायक रहते हुए दिग्विजय सरकार में मंत्री रहते हुए क्षेत्र का नेतृत्व किया। फिर भाजपा ने जातिगत समीकरण को ध्यान में रखते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष रहते हुए चंद्रभान सिंह को जबेरा से विधानसभा का टिकट देकर कांग्रेस के रत्नेश सालोमन के खिलाफ उतारा गया और चंद्रभान सिंह चुनाव जीत गए। लेकिन 2004 में लोकसभा चुनाव में चंद्रभान सिंह को दमोह लोकसभा से प्रत्याशी बनाया गया और वह जीतकर दिल्ली पहुंचे, इसके बाद उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया और जबेरा विधानसभा में उपचुनाव हुआ।
भाजपा से दशरथ सिंह चुनाव मैदान में थे और कांग्रेस से रत्नेश सालोमान। इस उपचनाव में दशरथ सिंह को प्रदेश में भाजपा की सरकार होने का फायदा मिला और वह चुनाव जीत गए। 2008 में विधान सभा के आम चुनाव हुए और रत्नेश सालोमन पुनः चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। इसी दौरान 2011 में उनका निधन हो गया और एक बार फिर जबेरा में उपचुनाव हुआ। कांग्रेस की ओर से सालोमन की बेटी तान्या चुनाव मैदान में थी और भाजपा की ओर से दशरथ सिंह थे। दसरथ सिंह ने यह उपचुनाव भी जीत लिया और प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री बने और इसी चुनाव के बाद यह सीट लोधी बाहुल्य के रूप में उभरी।
इसके बाद दोनों पार्टियों ने जबेरा विधानसभा से लोधीवाद के समीकरण को ध्यान में रखते हुए 2013 के आम चुनाव में कांग्रेस से प्रताप सिंह लोधी व भाजपा से दशरथ सिंह लोधी को टिकिट देकर चुनाव मैदान में उतारा गया। कांग्रेस के प्रताप सिंह ने भाजपा के दशरथ सिंह से यह सीट छीनते हुए हुए विजय प्राप्त की ओर 2018 में यहां से भाजपा के धर्मेंद्र सिंह लोधी चुनाव जीते।