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जवाब न देने पर कोर्ट सख्त: ऑफिसर इनचार्ज पर 10 हजार की कॉस्ट, शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति में आरक्षण का पालन न होने का मामला

Fri, 01 Apr 2022 08:49 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

कई अवसरों के बावजूद भी सरकार की ओर से जवाब न आने को कोर्ट ने आड़े हाथों लेते हुए ऑफिसर इनचार्ज (ओआईसी) पर दस हजार रुपये की कॉस्ट लगाई है। इसके साथ ही एकलपीठ ने सामान्य प्रशासन विभाग व विधि विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत तौर पर हाजिर होने के निर्देश दिये हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होना है। 
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Jabalpur High Court - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मप्र हाईकोर्ट ने शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति में आरक्षण का पालन न होने को चुनौती देने वाले मामले को गंभीरता से लिया। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने कई अवसरों के बावजूद भी सरकार की ओर से जवाब न आने को आड़े हाथों लेते हुए ऑफिसर इनचार्ज (ओआईसी) पर दस हजार रुपये की कॉस्ट लगाई है। इसके साथ ही एकलपीठ ने सामान्य प्रशासन विभाग व विधि विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत तौर पर हाजिर होने के निर्देश दिये हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होना है।
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उल्लेखनीय है कि यह मामला ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दायर किया गया था। जिसमें शासकीय अधिवक्ताओ की नियुक्तियों में आरक्षण नियम लागू करने की राहत चाही गई थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि उक्त याचिका में आठ अवसरों के वावजूद भी सामान्य प्रशासन विभाग बिधि विभाग ने जवाब दाखिल नहीं किया। जिस पर न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त करते हुए ऑफिसर इनचार्ज के विरुद्ध 10 हज़ार की कॉस्ट लगाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि उक्त राशि ओआईसी अपनी सैलरी से लीगल एड में जमा करें तथा आगामी तारीख 18 अप्रेल को सामान्य प्रशासन विभाग एवं विधि विभाग के प्रमुख सचिव व्यक्तिगत कोर्ट में उपस्थित रहेंगे।
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