मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अगर प्रदेश के भांजे-भांजियों से हर कदम पर साथ निभाने का वादा करते हैं, तो निभाते भी हैं। बात शिक्षा की हो, स्वास्थ्य की हो या फिर किसी चुनौती की। मध्यप्रदेश के बच्चों के 'मामा शिवराज' हर कदम उनके साथ खड़े दिखाई देते हैं। खरगोन का रहने वाला दो साल का मासूम त्रुवांशु बोलने और सुनने में असक्षम है। त्रुवांशु के पिता की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि वो बेटे के इलाज का पूरा खर्च उठा सकें।
त्रुवांशु के पिता को जब इलाज के लिए पैसों का इंतजाम होता नजर नहीं आया तो उन्होंने प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री से मदद गुहार लगाई। उन्होंने स्थानीय व्यक्ति की मदद से प्रदेश के मुखिया श्री चौहान को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी और इलाज के लिए अपनी असमर्थता से अवगत कराया। फिर क्या था मामा शिवराज ने तत्काल बच्चे के पिता से बात की और ऑपरेशन के लिए छह लाख 48 हजार रुपए की राशि जारी की। अगले हफ्ते बच्चे का ऑपरेशन होगा। सीएम चौहान ने त्रुवांशु के अच्छे स्वास्थ्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
त्रुवांशु खरगोन जिले के सेगांव तहसील के कंचनपुरा गांव के रहने वाले लोकेश कन्नौजे का बेटा है। कालू कुमार कन्नौजे नाम के व्यक्ति ने बच्चे की सेहत और उसके पिता की आर्थिक स्थिति के विषय में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को ट्वीट किया था। मुख्यमंत्री ने जानकारी मिलते ही मामले को संज्ञान में लिया और पिता लोकेश कन्नौजे से बात की। बच्चे की स्क्रीनिंग अरविंदो हॉस्पिटल में कराई गई। मुख्यमंत्री ने खरगोन जिले के सीएमएचओ से इस विषय में चर्चा की और अगले हफ्ते का समय त्रुवांशु के कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के लिए तय किया गया।
बाल श्रवण योजना के तहत राशि जारी, पिता ने दिया धन्यवाद
त्रुवांशु की सर्जरी के लिए 6 लाख 48 हजार रुपए की राशि बाल श्रवण योजना के तहत जारी की गई है। त्रुवांशु के पिता ने बताया कि उन्होंने अपने दोस्तों के जरिए अपनी परेशानी मुख्यमंत्री तक ट्वीट के जरिए पहुंचाई थी। सीएम ने उनके बेटे के इलाज के लिए राशि जारी की है। लोकेश ने मुख्यमंत्री श्री चौहान को इसके लिए धन्यवाद दिया है। अब उनका बेटा बोल और सुन सकेगा।
विपत्ति में साथ खड़े होते हैं संवेदनशील मुख्यमंत्री श्री चौहान
पहले भी ऐसे मौके आए हैं, जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आगे बढ़कर प्रदेशवासियों की मदद की है। एक गुहार पर उन्होंने कठिन से कठिन मुश्किल का हल निकाला है। हाल ही में अतिवर्षा के बाद प्रदेश में उत्पन्न हुई विकट परिस्थिति में मुख्यमंत्री चौहान ने रात भर जग कर, खुद बाढ़ के पानी में उतरकर लोगों को आश्वस्त किया कि वे सिर्फ एक मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि सात करोड़ प्रदेशवासियों के परिवार के मुखिया हैं। वो संवेदनशील मुखिया, जो परिवार के एक भी सदस्य पर आई मुश्किल को अपनी परेशानी समझकर हल निकालता है। खाने की, शिक्षा की, स्वास्थ्य की, रोजगार की हर बाधा दूर करने के लिए तत्पर रहता है। जिसके लिए मध्यप्रदेश ही मंदिर है और यहां रहने वाली सात करोड़ जनता भगवान है।