डॉ. महताब का कहना है कि मेरा मानना है कि यह केवल एक ही शहर है, जहां पर मुस्लिम इकट्ठा होकर सख्ती से रोजे को शाकाहारी व्यंजनों से तोड़ते हैं। आरएसएस की मुस्लिम शाखा मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने रमजान माह के दौरान प्रदेश के सभी जिलों में चुनिंदा मस्जिदों के बाहर इफ्तार पार्टी में रोजेदारों के लिए गाय के दूध से बना शरबत पेश किया जा रहा है। मंच के सह-संयोजक एसके मुद्दीन ने बताया कि इलाइची और अन्य सुगंधित मिश्रणों से गाय के दूध से बनाया गया शरबत रमजान माह के दौरान रोजदारों को इफ्तारी के समय पेश किया जा रहा है। इसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गाय का दूध कई तरह से फायदेमंद है। यह पचाने में आसान है, इसलिए इसे बच्चों को भी दिया जाता है।
रमजान में आई फलों की बहार
माह-ए-रमजान में तरबूज की डिमांड आम दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ी हुई है। जहां आम दिनों में 13 टन से भरी एक या दो गाड़ियां शहर की जरूरत पूरी कर दिया करती हैं, वहीं रमजान की शुरुआत से ही ये आंकड़ा करीब 7 ट्रक प्रतिदिन हो गया है। नवबहार सब्जी मंडी के थोक विक्रेता इरशाद राइन और नईम खान बताते हैं कि इन दिनों तरबूज का थोक रेट 10 से 15 रुपए तक है। जबकि खेरची दुकानों तक पहुंचने तक यह भाव 20 से 25 रुपए प्रति किलो तक पहुंच रहा है। इस आंकड़े के लिहाज से भोपाल में हर दिन 18 लाख रुपए से ज्यादा के तरबूज की बिक्री हो रही है।
ये भी पढ़ें: Ramadan Special: रमजान में तोप की आवाज से होते हैं सेहरी और इफ्तार, भोपाल रियासत में जारी है परंपरा
दस्तरखान पर सज रहे ये भी
तरबूज के अलावा इफ्तार के दस्तरख्वान पर दूसरे नंबर पर पसंद किया जाने वाला फ्रूट खरबूज है। भोपाल में इसकी खपत चंदेरी और मुंगावली से हो रही है। हर दिन इसके भी 4 से 5 ट्रक उतर रहे हैं। गले को तरावट और मन को सुकून देने में केला भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिसके लिए भुसावल ने मोर्चा संभाल रखा है। आम दिनों के 5 से 6 ट्रक के मुकाबले रमजान में करीब 10 ट्रक केला खप रहा है। इसके अलावा गर्मी से राहत देने वाला फल संतरा अपनी परंपरागत नगरी नागपुर से आ रहा है तो पपीते की पूर्ति भी भुसावल और प्रदेश के निमाड़ इलाकों से हो रही है।
शरबतों का बादशाह रूह अफज़ा
रोजादारों को हर शाम अफ्तारी में शरबत ए खास की तलब भी होती है। इसकी पूर्ति कई दशक से एक खास शरबत करता आ रहा है। रूह अफ़ज़ा का गाढ़ापन, इसका खुशबूदार जायका और सभी को पसंद आने वाला स्वाद अब भी बदस्तूर इफ्तार दस्तरख्वान की जीनत बना हुआ है। रूह अफ़जा के लिए लोगों की दीवानगी का आलम लॉक डाउन के दौरान उस समय देखने को मिली, जब ये बाजार से नदारद हो गया। पाकिस्तान से आयातित मिलता जुलता ब्रांड और कई तरह के लाल रंग लिए हुए शरबतों ने इस मौके से जमकर चांदी काटी थी। इस बीच नजारा यह भी देखने को मिला कि जिन लोगों को पुराने स्टॉक से रूह अफ़जा आसान उपलब्ध हो गया, उन्होंने अपने खास लोगों में इसका वितरण बतौर खास तोहफा पहुंचाया। नीयत ये भी थी कि रोजादारों को उनकी पसंद का शरबत मिलेगा तो उन्हें इसका सवाब (पुण्य) मिलेगा।
खजूर के जायके कई
पुराने जमाने की छत्ते वाली चिपचिपी पिंड खजूर अब चंद लोगों तक ही सीमित रह गई है। इसकी जगह बाजार में दर्जनों किस्म की स्वादिष्ट खजूर ने ले रखी है। अधिकतम सऊदी अरब से आयात होने वाली खजूर के दाम भी महंगी मिठाइयों से कुछ ज्यादा ही हैं। रोजा इफ्तार की एक शरई पाबंदी के लिहाज से इसका इस्तेमाल किया जाता है। आम दिनों में भी इसका उपयोग अब बढ़ता जा रहा है। जिसके चलते शहर भोपाल में कई बड़े शो रूम जैसी खूबसूरत खजूर दुकानें आकार लेने लगी हैं।
ये भी पढ़ें: माह ए रमजान: जानिए किन पांच बुनियाद पर टिका इस्लाम, रमजान महीने में पूरे होते हैं तीन उसूल
सब्जियों के दाम ने सिर उठाया
आमतौर पर रमजान माह में सेहरी, इफ्तार और रात को डिनर में नॉन वेज को ज्यादा डिमांड होती है। इसके बावजूद सब्जियों का महत्व भी अपनी जगह बना हुआ है। रमजान और गर्मी के मौसम की साथ साथ शुरुआत के बीच मंडियों में सब्जी की कमी का डंका बज गया है। भिंडी, गिलकी, पालक, गोभी जैसी सब्जियां क्षेत्रीय किसानों से न के बराबर तादाद में आ रही हैं। जिसका नतीजा इनकी उपलब्धता इंदौर और आसपास की मंडियों से हो रही है। शरबत, चटनी, खाने की कई डिशेज का साथ निभाने वाले नींबू ने भी अपने अधिकतम महंगा होने का ऐलान इन दिनों कर रखा है।
वक्त : सेहरी और इफ्तार
इफ्तार (5 मार्च) शाम 6.30 बजे
सेहरी (6 मार्च) सुबह 5.00 बजे