एमपी सरकार सायबर एक्सपर्ट करेगी तैयार
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ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल भुगतान और सरकारी रिकॉर्ड पर साइबर हमलों का खतरा बढ़ने के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। अब राज्य हर साल देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों से 10 इंजीनियरिंग स्नातकों को चुनकर एक साल की ट्रेनिंग देंगी। ट्रेनिंग के दौरान प्रत्येक को 25 हजार रुपये प्रतिमाह का भत्ता मिलेगा। सरकार ने इस पर काम शुरू कर दिया है। इन युवाओं का चयन इंटरव्यू के माध्यम से होगा। इन्हें IIT, NIT, NFSU, IISER और CDAC जैसे संस्थानों से चुना जाएगा।
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सरकारी सिस्टम की सुरक्षा के लिए तैयार होंगे विशेषज्ञ
इन इंजीनियरों को मध्य प्रदेश कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम यानी MP-CERT के साथ प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका काम सरकारी सिस्टम पर होने वाले साइबर हमलों की पहचान करना, उनका तुरंत जवाब देना, खतरे को कम करना और महत्वपूर्ण सरकारी डेटा को सुरक्षित रखना है। MP-CERT की स्थापना दिसंबर 2022 में की गई थी। आज सरकारी विभागों की अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन हैं। नागरिक सेवाओं से लेकर डिजिटल भुगतान, सरकारी डेटा, क्लाउड सिस्टम और दूसरे महत्वपूर्ण सिस्टम इंटरनेट और सूचना तकनीक पर निर्भर हैं। ऐसे में प्रशिक्षित साइबर विशेषज्ञों की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
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पांच साल में 80 करोड़ रुपये खर्च होंगे
मोहन सरकार ने MP-CERT के तहत 2026-27 से 2030-31 तक 80 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसके अलावा प्रशासनिक, तकनीकी, कंसल्टेंसी, साइबर घटना से निपटने, डिजिटल फोरेंसिक और सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर से जुड़े कामों के लिए करीब 3.99 करोड़ रुपये और 25 नए पदों की मंजूरी दी गई है। पहले से स्वीकृत 21 कर्मचारियों के वेतन में संशोधन के लिए 3.24 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है। जरूरत पड़ने पर दो विशेषज्ञों को अल्प अवधि के लिए रखा जा सकेगा। उन्हें अधिकतम 50 हजार रुपये प्रतिमाह तक भुगतान किया जा सकेगा।
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एक साल में 10 युवा होंगे प्रशिक्षित युवा
सरकार का यह फैसला सिर्फ तत्काल भर्ती तक सीमित नहीं है। हर साल 10 इंजीनियरों को प्रशिक्षण देने से पांच साल में कम से कम 50 युवा साइबर सुरक्षा का व्यावहारिक प्रशिक्षण ले सकेंगे। इससे प्रदेश में साइबर हमलों से निपटने के लिए विशेषज्ञों की एक स्थायी टीम तैयार करने में मदद मिलेगी।