विधायक फूल सिंह बरैया ने सीएम को लिखा पत्र
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मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ भेदभाव की शिकायतों को लेकर नया मुद्दा सामने आया है। विधायक फूलसिंह बरैया ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इन वर्गों के कर्मचारियों की शिकायतों की सुनवाई के लिए अलग प्रशासनिक न्यायाधिकरण बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि भेदभाव रोकने के लिए पहले भी सरकारी स्तर पर दिशा-निर्देश जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद पदोन्नति और नियुक्तियों में पक्षपात की शिकायतें सामने आती रही हैं। बरैया ने पत्र में ‘स्टेट एससी-एसटी-ओबीसी एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल’ गठित करने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि इस व्यवस्था से आरक्षित वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों की शिकायतों पर सुनवाई और जांच के लिए एक अलग मंच उपलब्ध हो सकेगा।
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1997 के निर्देशों के बाद भी शिकायतें
बरैया के मुताबिक, 12 नवंबर 1997 को तत्कालीन मुख्य सचिव ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सरकारी सेवकों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारियों सहित आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों के साथ भेदभाव की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की है।
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लोक निर्माण विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया पर सवाल
पत्र में लोक निर्माण विभाग में सहायक यंत्रियों से कार्यपालन यंत्री के पद पर पदोन्नति का मामला भी उठाया गया है। बरैया ने आरोप लगाया कि पदोन्नति प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं। उनके अनुसार, सामान्य वर्ग के कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच, कारण बताओ नोटिस या अन्य गंभीर प्रकरण लंबित होने के बावजूद पदोन्नति दी गई। वहीं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकारियों की पदोन्नति मामूली या प्रक्रियात्मक आधारों पर रोके जाने की शिकायतें मिली हैं। बरैया ने पत्र में बताया कि वर्ष 2006 से 2008 के दौरान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के 42 अधिकारियों को पदोन्नति से वंचित रखे जाने की जानकारी मिली है। इसी तरह वर्ष 2010 से 2019 के बीच भी आरक्षित वर्ग के कई अधिकारियों को पदोन्नति नहीं दिए जाने की शिकायतें सामने आईं। उन्होंने इन मामलों की जांच कराने की जरूरत बताई है।
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संविदा नियुक्तियों में भी चयन सूची से नाम हटाने की शिकायत
बरैया ने एक विभाग में संविदा नियुक्तियों के दौरान चयनित अभ्यर्थियों के नाम चयन सूची से हटाए जाने की शिकायतों का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के नाम चुनिंदा तरीके से हटाए जाने की शिकायतें हुईं, लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
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शिकायतों की सुनवाई के लिए अलग व्यवस्था की मांग
बरैया ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि आरक्षित वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ भेदभाव की शिकायतों की निष्पक्ष जांच और समयबद्ध निराकरण के लिए अलग प्रशासनिक न्यायाधिकरण बनाया जाए। उनका तर्क है कि ऐसी व्यवस्था होने से पदोन्नति, नियुक्ति और सेवा संबंधी मामलों में सामने आने वाली शिकायतों की सुनवाई के लिए संस्थागत मंच मिल सकेगा।