मध्य प्रदेश में ग्रामीणों को उनके मकान और भूखंड का कानूनी मालिकाना हक दिलाने के लिए स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्रियों का काम जारी है। प्रदेश में अब तक 7 लाख 62 हजार से अधिक रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य 40 हजार से अधिक गांवों के करीब 50 लाख परिवारों को निशुल्क रजिस्ट्री की सुविधा देना है। इससे ग्रामीणों को अपनी संपत्ति के वैधानिक दस्तावेज मिलेंगे और जरूरत पड़ने पर बैंक से कर्ज लेने में भी मदद मिल सकेगी। स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी वाली जमीन पर बने मकानों और भूखंडों के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। पात्र लोगों को उनकी संपत्ति का पंजीयन प्रमाणपत्र दिया जा रहा है। प्रदेश के सभी 55 जिलों में यह काम चल रहा है।
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छिंदवाड़ा में सबसे ज्यादा रजिस्ट्रियां
जिलेवार आंकड़ों के मुताबिक छिंदवाड़ा में सबसे ज्यादा 36,982 रजिस्ट्रियां पूरी हुई हैं। राजगढ़ में 33,130, सागर में 29,543, छतरपुर में 27,119 और शिवपुरी में 26,022 रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं। नरसिंहपुर में 24,919, उज्जैन में 24,576, सिवनी में 24,430, बालाघाट में 22,795 और रायसेन में 22,366 रजिस्ट्रियां पूरी की गई हैं। राजधानी भोपाल में अब तक 5,318 रजिस्ट्रियां हुई हैं। इंदौर में 16,708, जबलपुर में 21,523 और ग्वालियर में 12,200 रजिस्ट्रियां पूरी की जा चुकी हैं। सबसे कम 1,042 रजिस्ट्रियां मऊगंज में दर्ज की गई हैं। इसके अलावा अनूपपुर में 1,347, उमरिया में 1,576 और आलीराजपुर में 1,734 रजिस्ट्रियां हुई हैं।
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डिजिटल माध्यम से हो रहा काम
योजना में पंजीयन और दस्तावेजों के सत्यापन के लिए सारा ऐप और संपदा 2.0 जैसे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे अभिलेखों को दर्ज करने और पंजीयन की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिल रही है। स्वामित्व के दस्तावेज मिलने से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति पर कानूनी अधिकार साबित करने में सुविधा होगी। इसके साथ ही बैंक ऋण और दूसरी वित्तीय सुविधाएं लेने के अवसर भी बढ़ सकते हैं। योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध कराना और संपत्ति संबंधी अधिकारों को मजबूत करना है।