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MP News: भोपाल गैस पीड़ितों को एम्स भोपाल में मिलेगा मुफ्त इलाज, गैस राहत विभाग के साथ एमओयू साइन

Mon, 22 Jan 2024 07:46 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार


भोपाल गैस पीड़ितों को अब बिना किसी बाधा के एम्स भोपाल में मुफ्त इलाज मिलेगा। इसको लेकर भोपाल गैस राहत विभाग और भोपाल एम्स के बीच एमओयू हो गया है। 
  
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भोपाल एम्स - फोटो : social media
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विस्तार
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राजधानी के करीब 20 हजार गैस पीड़ित कैंसर रोगियों को अब एम्स भोपाल में मुफ्त में इलाज मिलेगा। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के दो साल पहले के आदेश पर प्रदेश सरकार और एम्स के बीच पिछले शनिवार को एमओयू हो गया। इसमें अब एम्स को गैस पीड़ितों के इलाज की राशि का भुगतान गैस राहत विभाग सीधे करेगा। भोपाल ग्रुप फॉर इन्फोर्मेशन एंड एक्शन की सदस्य रचना ढिंगरा ने बताया कि यह गैस पीड़ित संगठनों की लंबी लड़ाई और जारी आंदोलन की वजह से ही संभव हो पाया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने पिछली पेशी को गैस राहत विभाग से इसके बारे में पूछा था और अगली पेशी 24 जनवरी को जवाब प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया है। उन्होंने कहा कि एम्स भोपाल से आशा है कि वह एक दिशा निर्देशिका बनाए। जिससे कैंसर ग्रसित गैस पीड़ितों को त्वरित इलाज मिल सके। इसी के साथ बीएचएमआरसी से आशा है कि वे जल्द ही कदम उठाए जिससे अस्पताल में कैंसर विभाग  शुरू किया जा सके क्योंकि गैस पीड़ितों में कैंसर की बीमारी का दर पीड़ित आबादी से 10 गुना ज्यादा है।
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दो साल बाद हुआ एमओयू 
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बैंच ने सितंबर 2021 में मॉनीटरिंग कमेटी की रिपोर्ट पर एम्स में गैस पीड़ितों का इलाज नि:शुल्क करने को लेकर आदेश जारी किया गया था। यह याचिका भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन की तरफ से दायर की गई थी। मॉनीटरिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा गया था कि गैस पीड़ित कैंसर रोगियों को बीएमएचआरसी में इलाज नहीं मिल रहा है। अब गैस राहत विभाग को 24 जनवरी को हाईकोर्ट में आदेश को लेकर अपनी पक्ष रखना है। जिसके पहले विभाग की तरफ से लंबे समय से लंबित एमओयू की प्रक्रिया पूरी की गई। 

आदेश के बाद यह हो रही थी दिक्कत 
हाईकोर्ट के आदेश के बाद गैस पीड़ितों का इलाज की सुविधा शुरू हुई थी। इसको लेकर एम्स भोपाल भी दावा कर रहा था, लेकिन हकीकत में गैस पीड़ित मरीजों को इलाज मिलने में दिक्कत जा रही थी। दरअसल भोपाल गैस राहत विभाग मरीजों के इलाज की राशि स्वीकृत का पत्र के साथ एम्स रेफर कर रहा था, लेकिन इलाज के खर्च के भुगतान को लेकर विभाग और एम्स के बीच कोई स्पष्टता नहीं हो रही थी। ऐसे में एम्स मरीजों से इलाज की राशि वसूल रहा था और दवाईयां भी बाहर से खरीदने के लिए लिख रहा था। जिससे कई गरीब मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा था। इस तरह के लगातार मामले आने के बाद गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाले संगठनों ने मुद्दे को उठाया था।
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