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MP का फर्जी पासपोर्ट कांड: 2025 में 5 आवेदकों की सिफारिश वापस हुई, फिर रियल चौधरी को कैसे मिली क्लीन चिट?

Sat, 12 Sep 2026 12:06 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्य प्रदेश के फर्जी पासपोर्ट मामले में 2025 की पुलिस कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। उस समय पांच आवेदकों की सिफारिश वापस लेने के बाद रियल चौधरी को क्लीन चिट दिए जाने का दावा है, जबकि अब एसटीएफ की जांच में करीब 69 पासपोर्ट सामने आए हैं।
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एमपी में पासपोर्ट का फर्जीवाड़ा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश में बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट बनवाने के मामले में अब एक ऐसा पुराना घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पुलिस की पिछली जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा है कि इस मामले का सुराग पुलिस को 2025 में ही मिल गया था। तब रियल चौधरी उर्फ भंते मेतानंद से पूछताछ भी हुई थी। पांच पासपोर्ट आवेदकों की सिफारिश वापस ली गई, लेकिन इसके बाद रियल चौधरी को क्लीन चिट दे दी गई। अब एसटीएफ की मौजूदा जांच में फर्जी दस्तावेजों से बड़ी संख्या में पासपोर्ट बनाए जाने का मामला सामने आने के बाद 2025 की वह कार्रवाई फिर चर्चा में है।
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 2025 में क्या हुआ था
2025 में इंटेलीजेंस से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने रियल चौधरी से पूछताछ की थी। पूछताछ में रियल ने पासपोर्ट आवेदकों के वेरिफिकेशन में अपनी गवाही की जानकारी होने से इनकार किया था। इसके बाद पांच आवेदकों के लिए की गई सिफारिश वापस लिए जाने की बात सामने आई। दावा है कि पुलिस ने इसके बाद रियल चौधरी को क्लीन चिट दे दी। अब सवाल यही है कि अगर उस समय पुलिस तक वेरिफिकेशन में गड़बड़ी की जानकारी पहुंच गई थी, तो पूरे मामले की गहराई से जांच क्यों नहीं हुई?

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अब सामने आए इतने पासपोर्ट
एसटीएफ की जांच के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए करीब 69 पासपोर्ट सामने आए हैं। इनमें  40 पासपोर्ट भोपाल के अन्नानगर स्थित एक मठ से बने पाए गए, 17 पासपोर्ट डबरा से, 11 पासपोर्ट बैतूल, 1-1 पासपोर्ट छिंदवाड़ा और पांढुर्णा से बनाएं गए। जांच में इन पासपोर्ट के लिए फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।

फर्जीवाड़ा कैसे किया गया?
एसटीएफ के अनुसार, आरोप है कि कुछ बांग्लादेशी नागरिकों ने अपनी पहचान छिपाकर खुद को बौद्ध बताया। इसके बाद डबरा और आमला नगर पालिका से कथित तौर पर फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाए गए।इन दस्तावेजों के आधार पर आगे पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कराए गए और फिर पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया। भोपाल नगर निगम से भी ऐसे दस्तावेज बनाए जाने की जांच की जा रही है। यानी जांच का पूरा नेटवर्क केवल पासपोर्ट तक सीमित नहीं है। इसमें निवास प्रमाण पत्र, पहचान दस्तावेज और पुलिस वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया जांच के घेरे में है। 

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एक ही पते से इतने पासपोर्ट कैसे?
मामले में सबसे बड़ा सवाल भोपाल के अशोक बौद्ध विहार से जुड़ा है। जांच में बड़ी संख्या में पासपोर्ट आवेदकों को बौद्ध बताए जाने की बात सामने आई है। सवाल यह है कि जहां प्रबंधक के लिए केवल एक कमरा होने की बात कही जा रही है, वहां इतनी बड़ी संख्या में आवेदकों का पता और पहचान कैसे जुड़ गई? दूसरा सवाल रियल चौधरी को लेकर है। वह खुद को बैतूल जिले के ग्राम बोरखी का बताता था। ऐसे में उसके आधार पर भोपाल में पासपोर्ट आवेदकों का वेरिफिकेशन किस प्रक्रिया के तहत हुआ, इसकी भी जांच हो रही है। 

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अब पुलिस के तीन थाने जांच के घेरे में
एसटीएफ अब इस मामले में डबरा, आमला और भोपाल के गोविंदपुरा थाने में हुए पुलिस वेरिफिकेशन की जांच कर रही है। डबरा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी विनायक शुक्ला, आरक्षक भूपेंद्र गुर्जर और अलग-अलग समय में बीट संभालने वाले पुलिसकर्मियों की भूमिका जांची जा रही है। संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए पत्राचार भी किया गया है। भोपाल के गोविंदपुरा थाने में तत्कालीन थाना प्रभारी अशोक सिंह परिहार समेत संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आमला थाने में पासपोर्ट वेरिफिकेशन करने वाले पुलिसकर्मियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
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चार गिरफ्तारियां, जांच अभी जारी
एसटीएफ की कार्रवाई में रियल चौधरी और विप्लव अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद कथित बिचौलिए जॉय चौधरी को भी पकड़ा गया है। डबरा के फर्जी पते पर बने पासपोर्ट के एक धारक प्रियान अधिकारी की गिरफ्तारी भी हुई है। पूछताछ में पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने से लेकर पासपोर्ट बनवाने तक नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।

सबसे बड़ा सवाल: 2025 में क्या छूट गया?
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब 2025 में ही पुलिस तक सूचना पहुंच गई थी, पांच आवेदकों की सिफारिश वापस भी हुई थी, तो जांच उसी समय आगे क्यों नहीं बढ़ी? क्या उस समय सिर्फ पांच आवेदकों तक मामला मान लिया गया था? क्या बाकी आवेदकों के दस्तावेजों की दोबारा जांच हुई थी? और अगर रियल चौधरी को क्लीन चिट दी गई थी, तो अब एसटीएफ की जांच में उसका नाम दोबारा क्यों सामने आया? इन सवालों के जवाब मौजूदा जांच से सामने आने हैं। 

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तथ्यों के आधार पर कार्रवाई चल रही हैं 
एसटीएफ के डीआईजी राहुल लोढ़ा का कहना है कि इस मामले में अभी जांच चल रही है। इसमें अभी जो तथ्य सामने आ रहे है, उसके अनुसार कार्रवाई चल रही है। इसमें यदि पुलिस के कर्मचारियों की भी गड़बड़ी मिलती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए विभाग को लिखेंगे। 
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