मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत 50 लाख ग्रामीण परिवारों की संपत्तियों की निशुल्क रजिस्ट्री को लेकर सरकार और पटवारियों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। एक ओर सरकार योजना का काम समय पर पूरा कराने के लिए पटवारियों पर कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी ओर पटवारी संघ बर्खास्तगी और निलंबन वापस लेने की मांग पर अड़ा है। शुक्रवार सुबह पटवारी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। बैठक के बाद संघ पदाधिकारियों ने बताया कि उपमुख्यमंत्री ने मांगों पर सुधार के लिए नोटशीट मुख्य सचिव को भेजी है। हालांकि, पटवारियों ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने के बाद ही वे काम पर लौटेंगे।
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29 बर्खास्त, 129 निलंबित; 3500 से अधिक को नोटिस
स्वामित्व योजना का काम पूरा नहीं होने और पटवारियों के असहयोग को लेकर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कार्रवाई की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदेश में 29 पटवारियों को बर्खास्त और 129 से अधिक को निलंबित किया गया है। वहीं, 3500 से अधिक पटवारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों को योजना के काम की समीक्षा कर प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। परिवीक्षा अवधि में काम कर रहे पटवारियों पर भी कार्रवाई हुई है। जानकारी के अनुसार, देवास, रतलाम और आगर मालवा जिलों में कम से कम नौ परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं। पटवारी संघ के मुताबिक, 6 हजार से अधिक परिवीक्षाधीन पटवारियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। देवास में तीन पटवारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
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भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में भी कार्रवाई
सरकार की सख्ती स्वामित्व योजना के काम तक सीमित नहीं है। भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े मामलों में भी जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। भोपाल और सीहोर में जमीन के नामांतरण से जुड़े कथित रिश्वतखोरी के मामले में सख्ती दिखाई गई हैं। दोनों जिलों में पुराने लोकायुक्त मामले में जमीन के नामांतरण के बदले कथित रिश्वत मांगने के आरोपों के संबंध में पटवारियों के खिलाफ अभियोजन की अनुमति दी गई हैं।
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डिप्टी सीएम से मुलाकात, मुख्य सचिव को भेजी नोटशीट
शुक्रवार को उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी, मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल सहित अन्य पदाधिकारी शामिल थे। बैठक के बाद दोनों संघों के अध्यक्षों ने कहा कि उपमुख्यमंत्री ने उनकी मांगों को उचित माना है। संघ पदाधिकारियों के मुताबिक, चर्चा के बाद सुधार के लिए नोटशीट मुख्य सचिव को भेजी गई है। उन्होंने प्रदेशभर के पटवारियों से धैर्य रखने और एकजुट रहने की अपील की। संघ का कहना है कि बर्खास्तगी और निलंबन की कार्रवाई वापस ली जानी चाहिए। पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने के बाद ही पटवारी काम पर लौटेंगे।
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50 लाख रजिस्ट्री का लक्ष्य, विरोध से काम प्रभावित
राज्य सरकार ने 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी भूमि पर काबिज परिवारों को निशुल्क रजिस्ट्री का अभियान शुरू किया था। इसके तहत करीब 50 लाख हितग्राहियों को संपत्ति के दस्तावेज उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, पटवारियों के विरोध और उनकी आपत्तियों के चलते रजिस्ट्री की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
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दस्तावेजों में निष्पादक के रूप में हस्ताक्षर पर आपत्ति
पटवारियों की मुख्य आपत्ति संपत्ति के दस्तावेजों में निष्पादक के रूप में हस्ताक्षर करने और भविष्य में किसी कानूनी विवाद की जिम्मेदारी को लेकर है। उनका कहना है कि जिस संपत्ति पर उनका स्वामित्व नहीं है, उसके दस्तावेजों में उनकी भूमिका और कानूनी जवाबदेही स्पष्ट होनी चाहिए। दूसरी ओर, सरकार योजना के लक्ष्य और तय समयसीमा को देखते हुए काम शुरू कराने पर जोर दे रही है।
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पटवारियों की हड़ताल से अटक सकते हैं राजस्व के काम
पटवारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से जमीन से जुड़े कई जरूरी राजस्व कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इससे किसानों, जमीन मालिकों और ग्रामीण क्षेत्रों के आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। नामांतरण, भूमि बंटवारा, सीमांकन, खसरा-खतौनी और भूमि रिकॉर्ड में सुधार, फसल नुकसान का सर्वे, जाति, आय और निवास प्रमाणपत्रों के लिए जरूरी सत्यापन, सरकारी योजनाओं के हितग्राहियों का सत्यापन और राजस्व वसूली जैसे काम प्रभावित होने की आशंका है।