मध्यप्रदेश में सरकारी योजनाओं और सेवाओं से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए अब वरिष्ठ अधिकारियों को दूरदराज के जिलों में जाकर मौके पर समीक्षा करनी होगी। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को जिलों का दौरा कर शिकायतों की वास्तविक स्थिति देखने और जरूरत पड़ने पर शिकायतकर्ताओं से खुद बात करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि सिर्फ शिकायत बंद करना पर्याप्त नहीं है। अधिकारियों को यह भी पता लगाना होगा कि बार-बार शिकायत क्यों आ रही है और समस्या का स्थायी समाधान कैसे किया जा सकता है। वहीं, मुख्य सचिव ने विभागीय समीक्षा और आगामी कलेक्टर कॉन्फ्रेंस की तैयारियों के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की समिति गठित करने के निर्देश भी दिए हैं।
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रोज 55 हजार कॉल, 15 हजार शिकायतें
बैठक में CM हेल्पलाइन की स्थिति की समीक्षा के दौरान बताया गया कि रोजाना करीब 55 हजार कॉल आते हैं। इनमें लगभग 15 हजार शिकायतें दर्ज होती हैं। अब तक करीब 80 प्रतिशत शिकायतें शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बाद बंद की गई हैं। बाकी शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया जारी है। मुख्य सचिव ने लंबित शिकायतों को तय समय-सीमा में निपटाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कुछ शिकायतकर्ताओं से सीधे बातचीत कर यह जानने को भी कहा कि उन्हें वास्तव में समाधान मिला है या नहीं।
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8 लाख से ज्यादा आवेदन निपटाए
लोकसेवा गारंटी अभियान की समीक्षा में बताया गया कि अब तक 8 लाख से अधिक आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है। मुख्य सचिव ने विभागों को भारत सरकार से मिलने वाले पत्रों का जवाब अनिवार्य रूप से 15 दिन के भीतर देने के निर्देश दिए।
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योजनाओं की जमीनी स्थिति भी देखेंगे अफसर
समीक्षा में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना, राशन कार्ड, राशन दुकानों में खाद्यान्न की उपलब्धता, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, लाड़ली बहना, लाड़ली लक्ष्मी, प्रसूति सहायता और बिजली आपूर्ति जैसी योजनाओं की स्थिति की जानकारी ली गई।
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बालाघाट के 332 करोड़ के प्रोजेक्ट पर नजर
बैठक में 332 करोड़ रुपये के बालाघाट विकास प्रोजेक्ट की भी समीक्षा हुई। मुख्य सचिव ने अलग-अलग विभागों के प्रस्तावित कार्यों की स्थिति जानकर उन्हें जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। प्रोजेक्ट में ऊर्जा, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, जल संसाधन, कौशल विकास, आयुष, खाद्य, कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी और जनजातीय कार्य विभाग के काम शामिल हैं।