मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा कि प्रदेश में जनता और प्रशासन के बीच की दूरी समाप्त हुई है। मुख्यमंत्री जन-सेवा अभियान से केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं से 83 लाख से अधिक हितग्राहियों को जोड़ने में सफलता मिली। हमारे कार्यक्रम जनता के कार्यक्रम बन गए। 10 से 25 मई तक समस्याओं के निराकरण के लिए फिर से अभियान संचालित किया जाएगा। सिविल सेवकों को यह चुनौती स्वीकार करना है कि नागरिकों को अपने कामों के लिए भटकना न पड़े। गांव और शहरों के वार्डों में शिविरों के माध्यम से समस्याएँ हल की जाएं। नगर निगम या नगर पालिका के छोटे-मोटे काम जिनसे रोज वास्ता पड़ता है, लोगों को वहीं समस्या होती है। इसमें प्रशासन बदनाम होता है। हम इस सिविल सर्विस डे पर संकल्प करें कि एक भी ऐसा काम, जो जायज है, जो होना चाहिए, शेष न रहे।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के सभा कक्ष में सिविल सर्विस-डे के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आम जनता से जुड़े छोटे-छोटे काम, वास्तव में बड़े-बड़े काम होते हैं। सिविल सेवक इन कार्यों को समय पर पूरा करवा लें, यही सुशासन है। इस विशेष कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षाविद, लेखक इंफोसिस के पूर्व सदस्य और वर्तमान में मणिपाल ग्लोबल एजुकेशनल के अध्यक्ष मोहनदास पाई थे। शिवराज ने कहा कि सिविल सर्विस-डे का अर्थ यही है कि हम लोक सेवक हैं और देश की सेवा हमारा मुख्य उद्देश्य है। लोकतंत्र में जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा शासन होता है। मुख्यमंत्री और अतिथियों ने दीप जला कर सिविल सर्विस-डे का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री का स्वागत अनिरुद्ध मुखर्जी ने किया। पुलिस महानिदेशक सुधीर कुमार सक्सेना, अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन विनोद कुमार सहित बड़ी संख्या में आईएएस अधिकारी, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी उपस्थित थे।
आनंद और प्रसन्नता के साथ करें कार्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने मनुष्य को अनंत शक्तियों का भंडार बताया है। किसी कार्य में पूरी तरह प्रयत्न करना आवश्यक है। यदि एक बार सफल नहीं हुए तो फिर से प्रयास करना ही चाहिए। समय का भी सद्पयोग करना चाहिए। एक-एक क्षण कीमती है। आनंद और प्रसन्नता से कार्य करें। परिवार में सभी सदस्यों का ध्यान रखते हुए मनोयोग पूर्वक अपने शासकीय दायित्वों को निभाना आसान होता है। ऐसा ही जीवन प्रासंगिक होता है।
कई अफसर दिन-रात परिश्रम करते हैं
शिवराज ने कहा कि हमारे कई अधिकारी मित्र दिन-रात परिश्रम करते हैं मैं खुद साक्षी हूं। कई वर्षों से काम करते हुए देखा है। उन्हें देखकर गर्व होता है। अफसरों में अनेक ऐसे हैं जो दिन और रात जिद, जुनून और जज्बे के साथ काम करते हैं। अपने आप को पूरी तरह झोंक देते हैं। सरकार ने कोई रीति-नीति बनाई तो उसका स्वरूप निर्धारण करना और नीचे जमीन पर उतार देना। और एक है जो तत्काल परिणाम देने पर विश्वास करते हैं।
अफसरों को सलाह- अहंकार न करें
शिवराज ने अफसरों को सलाह दी कि अहंकार न करें कि हम तो आईपीएस हैं, आईएएस हैं, हम जनता के सेवक हैं। हमें अहंकार में नहीं रहना चाहिए। यह दिमाग में रहना चाहिए कि हम जनता की बेहतरी के लिए हैं। हमें हमेशा ये ऐहसास रहना चाहिए कि हम लोगों के लिए हैं। कई चुनौतियां आती हैं। उन परिस्थितियों का मुकाबला करना पड़ता है। धैर्य नहीं खोना है। आप टीम के लीडर हैं। हमारा उत्साह अगर कम हुआ तो हम कहीं काम नहीं कर पाएंगे और नुकसान देश व प्रदेश का होगा। आज प्रदेश को अगर यहां लाकर खड़ा किया है तो हमने किया है।
अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं सिविल सेवक
मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने कहा कि सिविल सर्विसेज की लंबी परंपरा देश में रही है। विशेष परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण स्थितियों का हमारी प्रशासनिक व्यवस्था डटकर मुकाबला करती है। अपने लंबे कार्यकाल में उन्हें ऐसा अवसर याद नहीं आता जब हमें कोई विशेष दायित्व दिया गया हो और अपेक्षा पर खरे नहीं उतरे हों। ऐसी दक्ष टीम के साथ काम करने का सौभाग्य मिला है, इस बात का संतोष है और गर्व भी है। चाहे कोरोना काल की बात हो या सिंहस्थ के आयोजन की बात हो या फिर माफिया के खिलाफ कार्रवाई का समय हो, अधो-संरचना का विकास हो या जनता की समस्याओं के निराकरण की व्यवस्था हो, मध्यप्रदेश में सभी प्रशासनिक आयामों पर अनेक उपलब्धियों का इतिहास रचा गया है।