मध्य प्रदेश में महिलाओं की बीमारियां पर रिसर्च लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन निष्कर्ष पर काम नहीं हो पा रहा। यही कारण है कि मध्य प्रदेश में प्रसव के दौरान देश में दूसरे नंबर पर महिलाओं की मौत हो जाती है। इस पर हो रहे शोधों को समझने एक कांफ्रेंस का आयोजन किया गया।
मध्य प्रदेश में प्रेग्नेंसी के दौरान और बाद में एक लाख में 173 महिलाओं की मौत हो जाती है, जबकि दूसरे देशों में यह आंकड़ा केवल 70 है। मध्य प्रदेश देश का दूसरा ऐसा राज्य है, जहां सबसे ज्यादा इस दौरान महिलाओं की मौत होती है। जबकि असम में एक लाख गर्भवती महिलाओं में से 195 महिलाओं की मौत हो जाती है। इसके अलावा अन्य कई राज्य जैसे उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब में भी मातृ मृत्युदर 100 से अधिक है। सबसे कम मातृ मृत्युदर केरल में है। यहां प्रति एक लाख गर्भवती महिलाओं में शिशु के जन्म के दौरान 19 महिलाओं की मौत होती है।
यह बात रविवार को राजधानी भोपाल में भोपाल प्रसूति एवं स्त्री रोग समिति द्वारा आयोजित प्रोग्रेसिव कार्यशाला में दिल्ली से आई समिति अध्यक्ष डॉ.अनीता श्रीवास्तव ने बताई। इस कार्यालय में राजधानी की सभी गाइनेकोलॉजिस्ट मौजूद रहीं। इसमें से जीएमसी की डीन डॉ. कविता एन सिंह, एनएचएम की डायरेक्टर डॉ. अरुणा कुमार, एचओडी जीएमसी गाइनेकोलॉजिस्ट विभाग डॉ. शबाना सुल्तान, डॉ माधुरी पटेल, डॉ बी भारद्वाज समेत कई विशेषज्ञयों ने अपनी राय रखी।
रिसर्च के साथ इंप्लीमेंटेशन भी जरूरी
जीएमसी की डीन डॉ. कविता एन सिंह ने कहा है कि प्रदेश में लगातार रिसर्च तो हो रहे हैं लेकिन उनका इंप्लीमेंटेशन नहीं हो पाता। बीमारियों को कंट्रोल करने के लिए शोध का प्रकाशन एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे छात्रों को जानना चाहिए। रिसर्चो को समझने के लिए इस तरह की कार्यशाला का आयोजन होते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हालांकि देश में महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान होने वाली मौतों (मातृ मृत्यु दर) में काफी कमी आ रही है। मध्य प्रदेश में भी कंट्रोल करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
गर्भावस्था के दौरान और बाद में होने वाली मौत के बताए कारण
डॉ. शबाना सुल्तान ने बताया कि ऐसे कई कारण होते हैं, जिनकी वजह से गर्भावस्था के दौरान महिला की मौत हो सकती है। मौजूदा या गर्भावस्था से पहले की स्वास्थ्य स्थितियां, जैसे हृदय रोग, मोटापा, अस्थमा और कमजोर इम्यून सिस्टम मातृ मत्यु का एक कारण बनते हैं। महिला द्वारा सक्रिय धूम्रपान करना। जुड़वा, तीन बच्चे या अन्य गुणज होना।
महिलाओं की कैसे करें देखभाल
डॉ. अरुणा कुमार ने बताया कि महिलाओं को शिक्षित कर मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। महिलाओं को प्रेग्नेंसी से पहले इससे संबंधित सभी जानकारियां होनी चाहिए। इससे मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने में मदद मिल सकती है। गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के लिए निर्देशित नीतियों को बढ़ाया जाना चाहिए। परिवार के सदस्यों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि परिवार में गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था में और बच्चे के जन्म के दौरान और बाद में उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल की सुविधा मिले। प्रेग्नेंसी के दौरान लाइफस्टाइल और खानपान का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। इसके लिए डॉक्टरों से सलाह ले सकते हैं।