मिलावटखोरों के खिलाफ शासन-प्रशासन की सख्ती जारी है लेकिन मिलावट का धंधा करने वाले सबक नहीं ले रहे। खाद्य पदार्थों में मिलावट कर लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला इंदौर में सामने आया है जहां ब्रांडेड घी की जगह खुद के घी का लेबल लगाकर बेचा जा रहा है।
कलेक्टर मनीष सिंह के निर्देश पर खाद्य औषधि प्रशासन की टीम भवंरकुआ चौराहा स्थित मेसर्स श्री शिव दूध डेयरी एंड स्वीट्स पर पहुंची और निरीक्षण किया। मौके पर पार्श्वनाथ घी 15 किलोग्राम टिन पर अपना ब्रांड श्री शिव देशी घी के लेबल लगाकर पैकिंग कर रहे थे और बेच रहे थे। मौके पर मौजूद फर्म के प्रोप्राइटर राहुल पिता प्रेमनारायण जिराती निवासी भंवरकुआं से खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम-2006 के अंतर्गत खाद्य पदार्थ मिश्रित दूध, मिल्क केक, मावा, पनीर, कृष्णा डेलिशियस स्वीट्स, दही, आसाम चाय, पार्श्वनाथ घी, पालीवाल घी, श्री शिव देशी घी, घी लूज के कुल 15 नमूने जांच के लिए गए। बेचने के लिए पैकिंग में रखा 2400 किलोग्राम घी और 20 किलोग्राम चाय जब्त की गई। जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत 9 लाख रुपए है। फर्म के प्रोपराइटर राहुल पिता प्रेमनारायण जिराती के विरुद्ध भंवरकुआ थाने पर धारा 420 आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
केमिकल मिलाकर बनाते थे नकली घी
मिलावटी घी का एक मामला पूर्व में सामने आया था जिसमें इंदौर के द्वारकापुरी में इसके लिए फैक्टरी डाल रखी थी। राजस्थान से ब्रांडेड घी मंगवाया जाता और उसकी कुछ मात्रा लेकर उसमें बाकी का डालडा घी मिलाते। केमिकल मिलाकर उसे सुगंधित बनाया जाता। इसके बाद सांची और अमूल जैसे लेबल चिपकाकर सस्ते दाम में बेचे जाते। करीब चार सालों से मिलावट का यह कारोबार चल रहा था और इस घी को कई लोगों को बेचा गया। इंदौर सहित आसपास के जिलों में भी इस घी का विक्रय किया गया।
मिठाई में मिले थे कीड़े
त्योहारों का सीजन चल रहा है, ऐसे में बाजार में खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका भी बनी हुई है। इसके चलते खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम कार्रवाई करने में जुटी है। दो दिन पहले देवास में की गई कार्रवाई में बंगाली मिठाई में कीड़े रेंगते हुए मिले थे। इसे मौके पर ही नष्ट करवाया गया था।