क्षेत्र संगठन मंत्री अंबरीष बताते हैं कि सांगठनिक पुनर्गठन के काम के तहत सितंबर में चलाए गए अभियान में प्रदेश में लगभग आठ हजार गांवों में संगठन की नई समितियां बनी हैं। इसी के साथ पुरानी समितियों में भी कई का पुनर्गठन किया गया है। गांव समितियों के जनवरी-फरवरी में ब्लॉक वार सम्मेलन किए जाएंगे। इसके बाद गांव-गांव ‘राम महोत्सव’ के आयोजन होंगे।
राम महोत्सव में जगह-जगह भगवान राम की पूजा-अर्चना के सामूहिक आयोजनों के साथ संगोष्ठियां होंगी। भगवान राम भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं। इसलिए स्वाभाविक है कि समितियों के सम्मेलनों और राम महोत्सव में हिंदुत्व की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के मुद्दे पर सहयोग का आह्वान किया जाएगा तथा उन्हें इसकी जरूरत भी बताई जाएगी।
इस बीच, सूत्र बताते हैं कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर मुद्दे पर अब तक हुई लड़ाइयों और मुकदमेबाजी की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाना चाहती है, जिससे वे सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के महत्व को समझ सकें। साथ ही यह भी समझें कि विहिप ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को हिंदुओं में सांस्कृतिक चेतना जगाने का जरिया क्यों बनाया। इन कार्यक्रमों में इन मुद्दों पर लोगों को विस्तार से जानकारी दी जाएगी।