राजधानी लखनऊ के सरकारी अस्पतालों में 100 से भी ज्यादा वेंटिलेटर खाली पड़े हैं, फिर भी गंभीर मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे कई लोग जान भी गंवा रहे हैं। इसका कारण वेंटिलेटरों का इस्तेमाल न होना है, जबकि दावा किया जाता है कि इन्हें चलाने के लिए पूरे स्टाफ व डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया गया है।
खास बात यह है कि निजी कंपनी तो इन्हें वेंटिलेटर चलाने में ट्रेंड करने का दावा कर रही है, लेकिन डॉक्टर व स्टाफ वेंटिलेटर चलाने के लिए खुद को प्रशिक्षित नहीं मान रहे हैं। ऐसे में अस्पताल प्रभारी अतिरिक्त स्टाफ की मांग करते हुए वेंटिलेटर यूनिट बंद किए हैं।
बलरामपुर अस्पताल में 57 वेंटिलेटर हैं लेकिन इनमें से एक का भी संचालन नहीं हो रहा है। बताया जा रहा है कि इन्हें चलाने के लिए स्टाफ नहीं है। वहीं, वेंटिलेटर इंस्टॉल करने वाली निजी कंपनी पूरे स्टाफ, डॉक्टरों को इसका प्रशिक्षण देने का दावा कर रही है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरके गुप्ता के मुताबिक, स्टाफ का प्रशिक्षण हुआ था, लेकिन वह 24 घंटे वेंटिलेटर यूनिट चलाने के लिए कुशल नहीं है। ऐसे में मैनपावर की मांग की गई है।