लहरों को साहिल की दरकार नहीं होती,
हौसला बुलंद हो तो कोई दीवार नहीं होती
जलते हुए चिराग ने आंधियों से ये कहा
उजाला देने वालों की कभी हार नहीं होती।
विधान परिषद में जब उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने वसीम बरेलवी के शेर के साथ बजट भाषण की शुरुआत की तो बतौर सपा एमएलसी वसीम बरेलवी भी वहां मौजूद थे और बजट का विरोध कर रहे सपा सदस्यों के साथ वेल में खड़े थे।
बजट भाषण में अपना ही शेर सुनकर उनके लबों पर हल्की सी मुस्कुराहट आ गई। बाद में उन्होंने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा, मेरे कह देने के बाद कोई भी शेर फिर मेरा नहीं रहता, वह सबका हो जाता है।