डीजीपी मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि किसान आंदोलन को लेकर जो संवेदनशील जिले हैं, वहां पुलिस अधिकारियों के साथ साथ जरूरत के हिसाब से पीएसी व अर्ध सैनिक बल के जवान तैनात किए जा रहे हैं।
लखीमपुर की घटना के बाद यूपी में आंदोलन को विस्तार देने के फिराक में किसान यूनियन के मंसूबों को नाकाम करने के लिए पुलिस विभाग ने कमर कस ली है। एक ओर जहां संवेदनशील 13 जिलों में अधिकारियों की तैनाती की गई है, वहीं बागपत और मुरादाबाद जैसे जिलों में अतिरिक्त फोर्स की मांग की गई है।
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जानकारी के अनुसार किसान आंदोलन को बढ़ने से किसी भी हाल में रोकने के लिए पुलिस महकमे ने कमर कस ली है। जिलों में अधिकारियों की फौज भेजने के बाद अब जिलों से पीएसी व अर्ध सैनिक बल की मांग की जा रही है। पुलिस के पास दिक्कत यह भी है कि केंद्र से किसान आंदोलन के मद्देनजर केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों की सिर्फ चार कंपनी ही मिली है। ये चारों कंपनियां लखीमपुर में ही तैनात हैं। इसके अलावा 4 कंपनी अधैसैनिक बल त्योहार के मद्देनजर दी गई है, जो प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में दुर्गा पूजा और दशहरा के लिए उपलब्ध कराई गई है।
डीजीपी मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि किसान आंदोलन को लेकर जो संवेदनशील जिले हैं, वहां पुलिस अधिकारियों के साथ साथ जरूरत के हिसाब से पीएसी व अर्ध सैनिक बल के जवान दिए जा रहे हैं। वहीं वाराणसी, मिर्जापुर, लखनऊ और कानपुर में दुर्गा पूजा और दशहरा को लेकर पीएसी की डिमांड की गई।
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किसानों की अरदास मंगलवार को, पुलिस मुस्तैद
उधर, लखीमपुर में मारे गए किसानों की अरदास मंगलवार को लखीमपुर खीरी में ही होनी है। इसमें भी बड़ी संख्या में भीड़ जुटने का अनुमान लगाया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि भीड़ किसी भी हाल में न जुटने पाए। इसके लिए किसानों से लगातार वार्ता भी की जा रही है।