वर्ष 2017-18 में 65.74 करोड़, वर्ष 2018-19 में 559.81 करोड़, वर्ष 2019-20 में 851.07 करोड़, 2020-21 में 487.61 करोड़ और वर्ष 2021-22 में 469.04 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की गई है। इस तरह इन पांच वित्तीय वर्षों में कुल 2433.27 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी हुई है।
बोगस फर्मों द्वारा वास्तविक माल की आपूर्ति के बिना ही करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी का मामला सामने आया है। वाणिज्यकर विभाग ने पिछले पांच वर्षों के दौरान 2433.27 करोड़ रुपये की यह टैक्स चोरी पकड़ी है। समीक्षा में यह मामला सामने आने पर आयुक्त वाणिज्यकर मिनिस्ती एस ने सोमवार को ऑनलाइन इंफोर्समेंट अलर्ट सिस्टम मॉड्यूल पर 15 मई तक टैक्स चोरी से संबंधित प्रकरणों को फीड करके जांच के निर्देश दिए हैं। जांच के बाद इनसे वसूली भी होगी।
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आयुक्त ने आदेश में कहा है कि जीएसटी मॉड्यूल से विशेष अनुसंधान इकाइयों की ओर से की गई जांच में अस्तित्वहीन फर्मों की गड़बड़ियां सामने आई हैं। इसमें वर्ष 2017-18 में 65.74 करोड़, वर्ष 2018-19 में 559.81 करोड़, वर्ष 2019-20 में 851.07 करोड़, 2020-21 में 487.61 करोड़ और वर्ष 2021-22 में 469.04 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की गई है। इस तरह इन पांच वित्तीय वर्षों में कुल 2433.27 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी हुई है।
बता दें कि बोगस फर्मों द्वारा वास्तविक आपूर्ति के बिना जारी बिल पर प्रदेश के अंदर और बाहर आईटीसी का दावा किया जाता है। यह विधिक रूप से मान्य नहीं है। पंजीकृत व्यक्तियों ने माल या सेवा या दोनों की वास्तविक आपूर्ति के बिना आईटीसी का लाभ लिया है, इसलिए इस मामले की जांच जरूरी है। मौजूदा समय इंफोर्समेंट अलर्ट सिस्टम मॉड्यूल में इसका पूरा ब्योरा दर्ज नहीं है।