वाहनों की खरीद के मामले में यूपी देश के शीर्ष तीन राज्यों में है। वाहन खरीदने की वृद्धि दर के मामले में यूपी पहले स्थान पर है। ऑटो इंडस्ट्री के मुताबिक 10 फीसदी जीएसटी से दोपहिया वाहनों की कीमतों में 10 हजार से 20 हजार रुपये तक की कमी आ सकती है। कारों के दाम 50 हजार रुपये तक सस्ते हो सकते हैं। दिवाली के दौरान ही यूपी में 40 हजार वाहनों की खरीद ज्यादा हो सकती है।
जेके सीमेंट के संयुक्त एमडी व सीईओ माधव सिंघानिया का कहना है कि सीमेंट लग्जरी नहीं, बल्कि आम जिंदगी और बुनियादी विकास से जुड़ा उत्पाद है। लंबे समय से इंडस्ट्री इस पर जीएसटी 28 से घटाकर 18 फीसदी करने की मांग कर रही थी। टैक्स घटने से रेट घटेंगे और विकास का दायरा बढ़ेगा। आम लोगों के घर बनाने की लागत में कमी आएगी।
सीआईआई यूपी की अध्यक्ष व यशोदा सुपर स्पेशियलिटी की एमडी डॉ. उपासना अरोड़ा का कहना है कि जीएसटी दरों में संशोधन से मांग में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला प्रणाली में जबर्दस्त प्रभाव पड़ेगा। स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम से जीएसटी हटाने से चिकित्सा सुरक्षा के दायरे में अधिक लोगों को शामिल करने में मदद मिलेगी। यूपी जैसा राज्य इस फैसले से सबसे ज्यादा लाभान्वित होगा।
सीआईआई यूपी के उपाध्यक्ष एवं अवध रेल इंफ्रा लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अभिषेक सर्राफ का कहना है कि यूपी में उद्योग की विनिर्माण क्षमता का विस्तार होगा। सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार होने के नाते यूपी में एमएसएमई को सीधा फायदा होगा। इससे राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) बढ़ेगा। स्लैब घटने से सरकार का राजस्व बढ़ेगा क्योंकि टैक्स देने वालों की संख्या में इजाफा होगा।
सीआईआई एमएसएमई पैनल व सीईओ एएमए हर्बल के संयोजक यावर अली शाह का कहना है कि यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अंतरराष्ट्रीय टैरिफ से निर्यातक परेशान हैं। आम आदमी की आय ज्यादा बचेगी। इस बची हुई आय को वह दूसरी जगह निवेश कर सकता है। इसका लाभ उपभोक्ता उत्पादों को भी होगा। हम सरकार के इस कदम की सराहना करते हैं।
उतर प्रदेश कपड़ा उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष अशोक मोतियानी ने कहा है कि जीएसटी दरें कम होने का हम स्वागत करते हैं। व्यापारियों में इसे लेकर खुशी है। मगर खुदरा कपड़ा उद्योग दुखी हैं। जीएसटी सुधार को लेकर रेडीमेड कपड़ों पर जीएसटी की दरें बढ़ा दी गई है जिससे देश भर के कपड़ा व्यापारियों में आक्रोश व्याप्त हो रहा है।
कपड़ा रोज़मर्रा के पहनने की जरूरत की वस्तु है कई दशक से कपड़े पर कोई टैक्स नहीं था लेकिन भारत में जीएसटी लागू होते ही कपड़ों पर जीएसटी दरें 5 प्रतिशत लागू की गई। आश्वासन दिए गए की कपड़ों पर रेट कभी नहीं बढ़ाए जाएंगे। जीएसटी दरें लागू होते ही कपड़ों से तैयार रेडीमेड पर 12 प्रतिशत जीएसटी दरें लागू की गई जबकि शुरुआत में रेडीमेड कपड़ों पर वैट 5 प्रतिशत प्रतिशत ही था अब इसे 18 प्रतिशत के दायरे में लाया जा रहा है जो कि बिल्कुल ही अनुचित है।
जीएसटी में सुधार करने की घोषणा के साथ ये कहा गया था कि 12 प्रतिशत दरों में लगभग 99 प्रतिशत वस्तुओं पर जीएसटी 5 प्रतिशत लागू किया जाएगा जबकि रेडीमेड कपड़ों में 2500 रुपए की खरीद को लग्जरी में रखते हुए इसे 18 प्रतिशत जीएसटी में सुधार के नाम पर बढ़ा दिया जाता है इससे देश भर के कपड़ा व्यापारी आहत हुए हैं। उन्होंने कहा कि कपड़ा व्यापारियों की तरफ से गुजारिश है कि इस पर पुनः विचार कर 5 प्रतिशत में लागू कर व्यापारियों की नाराजगी दूर करें।