प्रदेश के सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के 2000 से अधिक तदर्थ शिक्षकों को शासन की ओर से मानदेय पर रखने की तैयारी है। जानकारी के अनुसार इसके लिए निदेशालय स्तर से प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। हालांकि तदर्थ शिक्षक इससे संतुष्ट नहीं हैं। वह पूर्व की स्थिति बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
शासन की ओर से एडेड माध्यमिक विद्यालयों के 2000 से अधिक तदर्थ शिक्षकों को हटाए जाने के निर्णय को लेकर काफी नाराजगी है। इसके तहत शुक्रवार को माध्यमिक शिक्षक संघ के अलग-अलग गुटों ने विरोध-प्रदर्शन व विधानसभा घेराव का भी प्रयास किया था। वहीं सदन के अंदर भी इसका मुद्दा उठाया गया था। धरना-प्रदर्शन में माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जा रहा है।
शिक्षक नेताओं के अनुसार तदर्थ शिक्षकों को मानदेय पर रखने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। उन्हें शिक्षामित्रों की तरह एक निर्धारित मानदेय पर रखा जा सकता है। वहीं हाल में डीआईओएस के साथ हुई ऑनलाइन बैठक में तदर्थ शिक्षकों के बकाया मानदेय को भी जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। तदर्थ शिक्षक संघर्ष समिति के संयोजक राजमणि सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या कर विभाग हमें हटाने का प्रयास कर रहा है। हमें मानदेय स्वीकार नहीं है। पूर्व की हमारी स्थिति बहाल की जाए।