इससे पहले वीवीआईपी सुरक्षा में वर्षों से तैनात पुलिसकर्मियों को भी फायरिंग एवं फिटनेस टेस्ट के लिए बुलाया गया था। इसमें बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी फायरिंग टेस्ट में असफल हो गए थे। दोबारा परीक्षा देने के लिए बुलाने पर उन्होंने आने की जहमत तक नहीं की, ताकि वह अपनी वर्तमान तैनाती की जगह बरकरार रहे।
जिसके बाद सुरक्षा मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाते हुए पीएसी, कमिश्नरेट, जिलों, एसडीआरएफ और विशेष सुरक्षा बल से 102 पुलिसकर्मियों को चयनित कर वीवीआईपी सुरक्षा में तैनात करने की कवायद शुरू कर दी है।
बता दें कि वीवीआईपी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को 12,500 अतिरिक्त भत्ता मिलता है, जिसे हाल ही में बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है। इसी वजह से वर्षों से वीवीआईपी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी हटना नहीं चाहते हैं।
बेहोश हो गया था कमांडो
बता दें कि बीती 23 अप्रैल को पीलीभीत में आयोजित जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री की सुरक्षा में उनके पीछे खड़ा कमांडो अचानक गश खाकर बेहोश हो गया था। आनन-फानन उसे हटाकर दूसरे कमांडो को उसकी जगह तैनात करना पड़ा था। वहीं सुरक्षा मुख्यालय ने बीतें दिनों मुख्यमंत्री की सुरक्षा में 40 वर्ष से अधिक उम्र वाले पुलिसकर्मियों को तैनात नहीं करने का फैसला भी लिया था।